पुरानी गाडिय़ों में ई20 पेट्रोल डालने से खराब हो जाएगा इंजन? मारुति सुजुकी और ऑटो एक्सपट्र्स ने साफ की तस्वीर

Join Us

नई दिल्ली (ए.)। अगर आपके पास भी कोई पुरानी कार या बाइक है और आप पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले ई20 (20 फीसदी एथेनॉल ब्लेंडेड) पेट्रोल को लेकर असमंजस में हैं, तो आपके लिए एक बेहद जरूरी और राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार के मंत्रालयों और देश की दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनियों के शीर्ष विशेषज्ञों ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कर दिया है कि ई20 ईंधन पूरी तरह से सुरक्षित है और इससे वाहनों को कोई खतरा नहीं है। मारुति सुजुकी ने तो बाकायदा आंकड़ों के साथ एक ‘बयान-ए-भरोसा’ (स्टेटमेंट ऑफ कॉन्फिडेंस) जारी करते हुए करोड़ों वाहन मालिकों का डर हमेशा के लिए दूर कर दिया है।
मारुति सुजुकी का बड़ा दावा: 1.5 करोड़ पुरानी कारों में कोई खराबी नहीं
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मारुति सुजुकी के कॉरपोरेट अफेयर्स के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती ने ग्राहकों को आश्वस्त करते हुए एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा आंकड़ा साझा किया। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में मारुति सुजुकी ने देशभर में करीब 2.84 करोड़ कारों की सर्विसिंग की। इन गाडिय़ों में से 1.5 करोड़ से अधिक कारें तीन साल से ज्यादा पुरानी थीं, जो तकनीकी रूप से श्व20-प्रमाणित नहीं थीं। इसके बावजूद, फील्ड से ऐसी एक भी शिकायत सामने नहीं आई जहां श्व20 पेट्रोल की वजह से इंजन में जंग लगने, कल-पुर्जों के घिसने या किसी भी तरह के नुकसान की बात कही गई हो। उन्होंने साफ किया कि वाहनों को सुरक्षा के ऐसे मानकों पर डिजाइन किया जाता है कि वे श्व20 ईंधन को आसानी से झेल सकें और बाजार में किसी भी तरह के रेट्रोफिटमेंट किट की कोई जरूरत नहीं है।
माइलेज पर कितना पड़ेगा असर? एक्सपट्र्स ने गणित समझाकर दूर किया डर
अक्सर वाहन मालिकों के मन में यह सवाल रहता है कि एथेनॉल मिक्स पेट्रोल से गाड़ी का माइलेज कम हो जाता है। इस पर राहुल भारती ने पूरा गणित समझाते हुए कहा कि श्व10 के मुकाबले श्व20 पेट्रोल की कैलोरीफिक वैल्यू महज 3 से 3.5 फीसदी कम होती है, जिससे माइलेज पर भी सिर्फ इतना ही असर पड़ता है। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई कार 20 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती है, तो श्व20 पेट्रोल से उसका माइलेज सिर्फ 0.6 किलोमीटर कम होगा। उन्होंने कहा कि टायर प्रेशर, गाड़ी चलाने का तरीका, सही गियर का इस्तेमाल और समय पर मेंटेनेंस जैसे कारक माइलेज को इससे कहीं ज्यादा प्रभावित करते हैं। इसके विपरीत, एथेनॉल मिक्स होने से गाड़ी को बेहतर एक्सीलरेशन (पिकअप) मिलता है, इंजन में नॉकिंग की समस्या खत्म होती है और प्रदूषण भी बेहद कम होता है, जो इस मामूली कमी को पूरी तरह से कवर कर लेता है।

Previous articleकेंद्र सरकार ने 23 लोगों को आतंकवादी घोषित किया, जैश और लश्कर से जुड़े कई पाकिस्तान-आधारित नाम शामिल
Next articleबदरीनाथ धाम में चढ़ावे पर उठे सवाल, दान में गड़बड़ी के आरोपों की जांच शुरू; कर्मचारियों से मांगा स्पष्टीकरण