राम मंदिर: महाकुंभ के दौरान बढ़ी चंदा चोरी, ट्रस्ट सदस्यों की लड़ाई से खुला मामला

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अयोध्या के राम मंदिर चंदा विवाद में अब नए खुलासे हुए हैं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चंदा चोरी लंबे समय से हो रही थी, लेकिन छोटी-मोटी घटनाओं को नजरअंदाज कर दिया जाता था। हालांकि, पिछले साल महाकुंभ के दौरान जब मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी तो ये काम ज्यादा व्यवस्थित तरीके से होने लगा, क्योंकि दान की गिनती के लिए और लोगों को नियुक्ति किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, आम दिनों में मंदिर में रोजाना 85,000 से एक लाख लोग आते हैं, लेकिन महाकुंभ में ये आंकड़ा 10-12 लाख तक पहुंच गया था। इसके बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों की सलाह पर दान गिनती के लिए अतिरिक्त कर्मचारी लगाए गए। एक अधिकारी ने कहा, गिनती के काम में और मदद के लिए और स्थानीय लोगों को रोजगार देने की सलाह दी गई थी। भर्ती एक फर्म ने की थी।
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ट्रस्ट से जुड़े 2 सदस्यों के बीच भर्ती और कथित तौर पर पैसे की हेराफेरी को लेकर हुई आपसी लड़ाई के बाद यह मामला सामने आया। ये भी कहा गया है कि शुरू में मामले को दबाने की कोशिश की गई और जिन लोगों पर हेराफेरी का आरोप था, उनसे पैसे वापस जमा करने को कहा गया, लेकिन घटनाएं बाहर आती गईं।
एक पुलिस अधिकारी ने कहा, यह पहली बार नहीं था जब मंदिर के अधिकारियों को पैसे की हेराफेरी के बारे में पता चला हो। लंबे समय तक इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया और इसे नजरअंदाज किया जाता रहा, लेकिन हाल ही में कई घटनाओं के कारण एक के बाद एक खुलासे हुए।रिपोर्ट के मुताबिक, शक है कि रोजाना 6 से 8 लाख रुपये चोरी किए जा रहे थे।
एसआईटी ने बीते दिन दूसरी बार ट्रस्ट से जुड़े रहे चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव से पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक, उनसे उनकी निजी संपत्ति और आय के स्रोतों के बारे में पूछताछ की गई। एसआईटी ने तीनों से उनकी चल और अचल संपत्ति की जानकारी मांगी है और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज जमा करने को कहा है। एसआईटी कुछ सालों में अनिल और गोपाल की संपत्ति में हुई बढ़ोतरी की भी जांच कर रही है।

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