मोजतबा ने ईरान-अमेरिका समझौते पर कहा- बेताब थे ट्रंप, ईरानी अधिकारों के आश्वासन पर दी मंजूरी

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अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अपना पहला बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अलग राय होने के बावजूद उन्होंने समझौते को मंजूरी दी है। मोजतबा ने कहा कि राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने यह आश्वासन दिया कि ईरान के अधिकारों और प्रतिरोध मोर्चे के हितों की रक्षा की जाएगी, जिसके बाद वे सहमत हुए हैं।
मोजतबा ने कहा, असल में, मेरी राय अलग थी, लेकिन, सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद प्रमुख के तौर पर पेजेश्कियन ने अपनी और दूसरे सदस्यों की तरफ से ईरानी देश और प्रतिरोध मोर्च के अधिकारों की सुरक्षा के बारे में जो वादा किया था, और उस जिम्मेदारी को मानने के कारण, मैंने अपनी इजाजत दे दी। मोजतबा ने कहा कि यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही थे, जिन्होंने हताशा में आकर समझौते को अंजाम देने के लिए हर तरह का फायदा उठाया।
सर्वोच्च नेता ने आगे कहा, अगर अमेरिकी पक्ष भविष्य की बातचीत में बहुत ज़्यादा मांगे करना चाहेगा, तो ईरान उन्हें नहीं मानेगा। ईरान समझौते के प्रभावों को देखने के लिए इंतजार करेगा, लेकिन, यह साफ है कि भविष्य में आमने-सामने होने वाली बातचीत का मतलब दुश्मन की बात मानना नहीं होगा। बता दें कि गुरुवार को राष्ट्रपति ट्रंप और पेजेश्कियन ने समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसकी शर्तें तुरंत प्रभाव से लागू हो गई हैं।
अमेरिका-ईरान के बीच हुए 14 सूत्रीय शर्त सार्वजनिक हो गई है। उसे पहले अमेरिकी व्हाइट हाउस ने फिर ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने भी जारी किया था। इसमें लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध रोकना, ईरान से प्रतिबंध हटाना, ईरान को परमाणु हथियार बनाने की मंजूरी न देना और उसे पुनर्निर्माण के लिए 28 लाख करोड़ रुपये की आर्थिक मदद देना शामिल है। समझौते में 60 दिनों की बातचीत की अवधि तय की गई है, जिसमें कई मुद्दों पर चर्चा होगी।

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