–विभाग की कार्यप्रणाली पर भी उठे गंभीर सवाल; बड़े बेटे की सहमति के बिना फाइल एक टेबल से दूसरी टेबल पर पहुंची
-छोटे भाई पर माता को गुमराह कर गोपनीय तरीके से फाइल आगे बढ़ाने का आरोप
भोपाल (संदीप पंडा)। जल संसाधन विभाग में ड्राइवर के पद पर कार्यरत रहे स्वर्गीय गुलाबचंद्र शर्मा के आकस्मिक निधन के बाद उनके परिवार में अनुकंपा नियुक्ति को लेकर गहरा तनाव और विवाद पैदा हो गया है। मृतक कर्मचारी के बड़े पुत्र नीरज शर्मा ने अपने सगे छोटे भाई धीरज शर्मा और बहन निशा सैनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले को प्रशासनिक और कानूनी चौखट पर ला खड़ा किया है। विवाद इस कदर बढ़ चुका है कि पीडि़त पक्ष ने न्याय न मिलने की स्थिति में आत्मघाती कदम उठाने तक की चेतावनी दे डाली है।
बड़े पुत्र नीरज शर्मा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, उनके पिता की जीवित अवस्था में उन्होंने और उनकी पत्नी ज्योति शर्मा ने पूरी निष्ठा के साथ उनके भोजन, दवाइयों और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं की देखभाल की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनका छोटा भाई धीरज शर्मा और उसकी पत्नी, पिता के जीवित रहते हुए उनसे अलग रह रहे थे और उन्होंने वृद्ध पिता की कोई सेवा नहीं की। परंतु, पिता के स्वर्गवास होते ही धीरज शर्मा ने संपत्ति और नौकरी के लालच में आकर माता श्रीमती सूरजकली शर्मा को अपने प्रभाव में ले लिया और उन्हें बड़े बेटे के विरुद्ध खड़ा कर दिया।
विवाद का मुख्य कारण: कानूनी सहमति और योग्यता की अनदेखी
नियमानुसार अनुकंपा नियुक्ति के लिए परिवार के सभी आश्रित सदस्यों की सहमति अनिवार्य है। आरोप है कि छोटे भाई धीरज शर्मा ने बड़े भाई की बिना अनुमति और हस्ताक्षर के, माता सूरजकली शर्मा और बहन निशा सैनी के हस्ताक्षर कराकर गोपनीय तरीके से विभाग में फाइल सबमिट कर दी। योग्यता के मामले में भी बड़ा भाई नीरज शर्मा (10वीं उत्तीर्ण) स्वयं को पहली प्राथमिकता का हकदार बता रहा है, जबकि छोटा भाई धीरज 10वीं अनुत्तीर्ण है।
इस पूरे मामले में जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में आ गई है। पीडि़त नीरज शर्मा का कहना है कि विभाग के संबंधित सेक्शन द्वारा इस संवेदनशील मामले में एक बार भी बड़े बेटे को बुलाकर उसका पक्ष नहीं जाना गया और न ही उसकी अनिवार्य अनापत्ति या सहमति ली गई। इसके बावजूद फाइल को अत्यंत रहस्यमयी तरीके से एक सेक्शन से दूसरे सेक्शन में अग्रसारित कर दिया गया, जो प्रशासनिक नियमों का खुला उल्लंघन प्रतीत होता है।
नीरज शर्मा ने भावुक होते हुए बताया कि पिता की मृत्यु के बाद उनकी जीवनभर की जमा पूंजी और आर्थिक लाभों पर छोटे भाई धीरज ने माताजी को बहला-फुसलाकर पूरी तरह कब्जा कर लिया है। वर्तमान में धीरज शर्मा, माताजी को मिलने वाली पेंशन और मृत्यु उपरांत मिली मोटी राशि के बल पर ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहा है, जबकि बड़ा बेटा नीरज शर्मा पिता के जाने के बाद कर्ज लेकर अपने बच्चों का भरण-पोषण करने को मजबूर है। इसके साथ ही धीरज और बहन निशा द्वारा उन्हें लगातार प्रताडि़त किया जा रहा है और पैतृक मकान व राशि में से एक भी रुपया न देने तथा घर से बेदखल करने की धमकियां दी जा रही हैं।
सपरिवार आत्मदाह की चेतावनी
इस चौतरफा मानसिक उत्पीडऩ और आर्थिक तंगी से दुखी होकर नीरज शर्मा एवं उनकी पत्नी ज्योति शर्मा ने स्पष्ट कहा है कि यदि उन्हें उनका विधिक और नैतिक अधिकार नहीं मिलता है, तो वे अपने बच्चों के साथ सामूहिक आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने साफ किया है कि यदि उनके परिवार को कुछ भी होता है, तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी उनके भाई धीरज शर्मा और बहन निशा सैनी की होगी। पीडि़त पक्ष इस मामले की लिखित सूचना संबंधित थाने में भी दर्ज कराने जा रहा है ताकि इस मानसिक उत्पीडऩ पर रोक लग सके और उन्हें न्याय मिल सके।








