-वैश्विक तेल संकट का भारत पर होगा असर
तेहरान(ए.)। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कड़ा नियंत्रण रखने के बाद, अब ईरान ने लेबनान के मुद्दे को लेकर एक और बेहद संवेदनशील समुद्री रास्ते बाब अल-मंदेब को बंद करने की धमकी दी है। लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोडऩे वाला यह जलडमरूमध्य स्वेज नहर के जरिए एशिया और यूरोप के बीच होने वाले 12 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का दक्षिणी दरवाजा है। खाड़ी देशों से रोजाना गुजरने वाला 60 से 80 लाख बैरल कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर जाता है। ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोही लगातार इस मार्ग को निशाना बनाने की चेतावनी दे रहे हैं। यदि ऐसा हुआ तो भारत भी प्रभावित होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान के लिए बाब अल-मंदेब को पूरी तरह ब्लॉक करना आसान नहीं है। इसके एक छोर (यमन) पर भले ही हूतियों का आंशिक प्रभाव हो, लेकिन दूसरी तरफ जिबूती और इरिट्रिया में अमेरिका, फ्रांस, चीन और जापान जैसे शक्तिशाली देशों के सैन्य अड्डे हैं, जो लगातार समुद्री गश्त करते हैं।
हालांकि, पूरे रास्ते को बंद किए बिना भी हूती विद्रोही ड्रोन, मिसाइल और समुद्री बारूदी सुरंगों के जरिए जहाजों को डरा सकते हैं। यदि जहाज अपना रास्ता बदलकर अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप से जाते हैं, तो यात्रा में 10 से 14 दिन का समय बढ़ जाएगा, जिससे माल ढुलाई और बीमा का खर्च आसमान छूने लगेगा।
हूती विद्रोहियों का इस रूट पर आतंक नया नहीं है। नवंबर 2023 में हूतियों ने तुर्की से भारत आ रहे एक मालवाहक जहाज गैलेक्सी लीडर का लाल सागर में अपहरण कर लिया था। हालांकि इस जहाज पर कोई भारतीय नागरिक नहीं था, लेकिन इसके क्रू मेंबर्स को 15 महीने तक यमन के होदेदाह बंदरगाह पर बंधक बनाकर रखा गया, जिन्हें जनवरी 2025 में गाजा युद्धविराम के बाद रिहा किया गया। हूतियों के हमलों के कारण इस रूट से तेल और एलएनजी टैंकरों की आवाजाही पहले ही आधी रह गई है, और ईरान की नई धमकी ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंताएं और बढ़ा दी हैं।








