नईदिल्ली, (आरएनएस)। नीट पेपर लीक को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने परीक्षा कराने वाली राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) को सख्त फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि ये बहुत दुख की बात है कि एनटीए ने अपनी पिछली गलतियों से कुछ नहीं सीखा है। कोर्ट ने एनटीए से यह भी पूछा कि उसके पुराने आदेशों के तहत गठित की जाने वाली निगरानी समिति का क्या हुआ।
कोर्ट ने कहा, हम परीक्षा पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहे हैं। यह दुख की बात है कि उन्होंने सबक नहीं सीखा है। हमने एक आदेश पारित किया। एक समिति का गठन किया गया। उसने सिफारिशें दीं, जिन्हें स्वीकार कर लिया गया। एक निगरानी समिति भी थी। हम एनटीए को निर्देश देते हैं कि वह 14 नवंबर, 2024 को गठित निगरानी समिति के संबंध में अपनी स्थिति बताते हुए एक हलफनामा दायर करे। कोर्ट ने एनटीए, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पीठ ने न्यायमूर्ति राधाकृष्ण को परीक्षा सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के लिए पहले गठित उच्चाधिकार समिति की सिफारिशों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों को रिकॉर्ड पर रखने का भी निर्देश दिया है। 3 दिन के भीतर इसका जवाब देना होगा। इस मामले की आगे की सुनवाई 29 मई को होगी।ये याचिका फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने दायर की है। इसमें एनटीए को बदलने या उसके ढांचे में बदलाव करने और न्यायिक निगरानी में दोबारा परीक्षा आयोजित करने के निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में कोर्ट से केंद्र सरकार को यह निर्देश देने की मांग की गई कि वह नीट के आयोजन के लिए एनटीए की जगह किसी मजबूत, तकनीकी रूप से उन्नत और स्वायत्त संस्था को नियुक्त करे।
3 मई को 22 लाख से ज्यादा छात्रों ने नीट-यूजी की परीक्षा दी थी। हालांकि, पेपर लीक होने के चलते इसे 12 मई को रद्द कर दिया गया था। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है, जिसने दिल्ली, राजस्थान और महाराष्ट्र से 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें से 3 प्रोफेसर हैं और एनटीए से जुड़े हुए हैं। एनटीए 21 जून को दोबारा से नीट की परीक्षा कराएगी।
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