भारतीय विदेश मंत्रालय ने प्रेस की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के मामले में भारत के रिकॉर्ड का जोरदार बचाव किया. यह बचाव ओस्लो में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नॉर्वे के एक पत्रकार द्वारा पूछे गए सवाल के बाद किया गया. इसमें पत्रकार ने पूछा था कि भारत पर भरोसा क्यों किया जाना चाहिए और प्रधानमंत्री मोदी प्रेस के सवालों का जवाब क्यों नहीं देते.
विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने ओस्लो में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि कई लोग अज्ञानी गैर-सरकारी संगठनों द्वारा प्रकाशित रिपोर्टों को पढक़र भारत को गलत समझते हैं. जॉर्ज ने भारत के मीडिया तंत्र के विशाल आकार और विविधता पर प्रकाश डालते हुए पत्रकार के साथ तीखी बहस भी की.
जॉर्ज ने कहा, आप जानते हैं कि यहां कितनी खबरें आती हैं. हर शाम कितनी ब्रेकिंग न्यूज़ आती हैं. अकेले दिल्ली में ही कम से कम 200 टीवी चैनल हैं. अंग्रेजी, हिंदी और कई अन्य भाषाओं में. लोगों को भारत के विशाल आकार की समझ नहीं है. लोग कुछ अज्ञानी गैर-सरकारी संगठनों द्वारा प्रकाशित एक-दो खबरें पढ़ते हैं और फिर आकर सवाल पूछते हैं.
उन्होंने पलटवार करते हुए कहा, हम विश्व की जनसंख्या का एक-छठा हिस्सा हैं, लेकिन विश्व की समस्याओं का एक-छठा हिस्सा नहीं. विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को यह मौलिक अधिकार देता है कि यदि उसे लगता है कि उसके अधिकारों का उल्लंघन हुआ है तो वह न्यायालयों का रुख कर सकता है.
उन्होंने कहा कि भारत ने स्वतंत्रता के समय से ही महिलाओं के लिए समान मतदान अधिकार सुनिश्चित किए हैं. भारत समानता और मानवाधिकारों में विश्वास रखता है, और उन्होंने कहा कि मतदान करने और सरकार बदलने का अधिकार लोकतांत्रिक स्वतंत्रता का सबसे सशक्त उदाहरण है.
उन्होंने कहा, हमारे पास एक संविधान है जो जनता के अधिकारों, मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है. आप जानते हैं, हमारे देश की महिलाओं को समान अधिकार प्राप्त हैं, जो बहुत महत्वपूर्ण है. 1947 में, हमने अपनी महिलाओं को मतदान का अधिकार दिया.
भारतीय अधिकारी ने आगे कहा, हमने मिलकर स्वतंत्रता प्राप्त की. मैं जिन कई देशों को जानता हूं, वहां महिलाओं को मतदान का अधिकार भारत द्वारा स्वतंत्रता दिए जाने के कई दशकों बाद मिला. हम समानता में विश्वास करते हैं, हम मानवाधिकारों में विश्वास करते हैं. और मानवाधिकारों का सबसे अच्छा उदाहरण क्या है ? सरकार बदलने का अधिकार, मतदान का अधिकार. और यही भारत में हो रहा है. हमें इस पर बहुत गर्व है.
भारत द्वारा कानूनी मानदंडों और अंतरराष्ट्रीय मानकों के पालन पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, भारत एक ऐसा देश है जो कानून के शासन में विश्वास रखता है. हम हमेशा से हर जगह नियमों का पालन करते आए हैं. हम नियमों के अनुसार चलते हैं. यही भारत की प्रतिष्ठा है.
यह पूछे जाने पर कि दुनिया को भारत पर भरोसा क्यों करना चाहिए, सिबी जॉर्ज ने कोविड-19 महामारी जैसी वैश्विक चुनौतियों के दौरान देश की भूमिका का उल्लेख किया और भारत की सभ्यतागत विरासत पर प्रकाश डाला. जॉर्ज ने गणित, संस्कृति और वैश्विक विरासत में भारत के योगदान का भी जिक्र किया.
उन्होंने कहा, आप चारों ओर देखिए, दुनिया भर में आपको भारत से जुड़ाव नजऱ आएगा. आपके फ़ोन पर दिखने वाले अंक भारत में ही बने हैं. शून्य, यानी ज़ीरो, भारत ने इसकी खोज की. शतरंज भारत में ही शुरू हुआ. इसलिए हमें उस सभ्यता पर गर्व है. योग, जिसकी आज पूरी दुनिया प्रशंसा करती है, भारत से ही निकला है. भारत में महाकाव्य और पुस्तकें भी हैं. यह बातचीत भारत में सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गई और कई लोगों ने वरिष्ठ राजनयिक की इस स्थिति को आत्मविश्वास से संभालने के लिए प्रशंसा की.
हालांकि, भारत में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर नॉर्वे में पत्रकारों के सवालों का जवाब न देने के आरोपों को लेकर निशाना साधते हुए कहा, जब छिपाने के लिए कुछ नहीं होता, तो डरने की कोई बात नहीं होती.
कांग्रेस नेता ने ये टिप्पणियां एक्स पर नॉर्वे की एक पत्रकार का वीडियो साझा करते हुए कीं, जिसमें मोदी को पत्रकार के सवाल पूछने की कोशिश करने पर उससे दूर जाते हुए देखा गया. गांधी ने एक्स पर कहा, जब दुनिया एक दागी प्रधानमंत्री को कुछ सवालों से घबराते और भागते हुए देखती है, तो भारत की छवि को क्या नुकसान होता है?
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन की एक तस्वीर साझा करते हुए आश्चर्य व्यक्त किया कि भारतीय प्रधानमंत्री अपने डच समकक्ष को क्या समझा रहे हैं. रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, स्वयंभू लेकिन पूरी तरह से बेनकाब हो चुके विश्वगुरु, डच प्रधानमंत्री को क्या फर्जी ज्ञान दे रहे हैं, जिन्होंने वास्तव में उन्हें सबके सामने बेनकाब किया?








