अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह मंगलवार को ईरान पर सैन्य हमला करने वाले थे, लेकिन उसे खाड़ी देशों के अनुरोध पर टाल दिया है। उन्होंने बताया कि कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति, मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान ने उनसे ईरान पर हमला न करने का अनुरोध किया था।
ट्रंप ने ट्रुथ पर लिखा, खाड़ी देशों के नेताओं ने कहा कि मैं ईरान पर अपने नियोजित सैन्य हमले को अभी रोक दूं। यह हमला कल के लिए तय था, लेकिन अब इस पर गंभीर बातचीत चल रही है। इन महान नेताओं और सहयोगियों की राय में, एक ऐसा समझौता हो जाएगा जो अमेरिका के साथ-साथ मध्य-पूर्व और उससे बाहर के सभी देशों को पूरी तरह से स्वीकार्य होगा। समझौते में ईरान के पास परमाणु हथियार न होना प्रमुख होगा।
ट्रंप ने आगे बताया कि खाड़ी देशों के नेताओं के प्रति सम्मान के चलते, मैंने युद्ध सचिव पीट हेगसेथ, जॉइंट चीफ़्स ऑफ़ स्टाफ़ के चेयरमैन जनरल डैनियल केन, और अमेरिका की सेना को निर्देश दिया है कि हम कल ईरान पर अपना नियोजित हमला नहीं करेंगे। उन्होंने सेना से कहा कि अगर कोई स्वीकार्य समझौता नहीं होता है, तो वे बिना किसी देरी के, ईरान पर एक पूर्ण और बड़े पैमाने का हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार रहें।
अमेरिका ने ईरान को जो शांति प्रस्ताव भेजा है, उसमें 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम सौंपने, अपने परमाणु संयंत्रों का संचालन एक ही संयंत्र तक सीमित रखने और युद्ध क्षतिपूर्ति के दावों को छोडऩे और ईरान की अधिकांश जब्त संपत्तियां अवरुद्ध रहने की बात कही है। ईरान चाहता है कि शांति वार्ता शुरू होने से पहले प्रतिबंधों को हटाया जाए, विदेशों में जब्त संपत्तियों को जारी की जाए और क्षेत्र में सैन्य अभियानों पर स्थायी रोक लगाई जाए।








