नीट पेपर लीक केस 2026 : सीबीआई के रडार पर पीवी कुलकर्णी, पुराने पेपर सेटिंग की हो रही जांच

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नई दिल्ली (आरएनएस)। नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जांच एजेंसी ने गिरफ्तार आरोपी पीवी कुलकर्णी से उन सभी परीक्षा पत्रों को लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, जिन्हें उन्होंने अपनी गिरफ्तारी से पहले तैयार किया था। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियों को शक है कि उनका संबंध नीट 2024 पेपर लीक समेत कई अन्य मामलों से भी हो सकता है। महाराष्ट्र के लातूर से सामने आया यह पूरा नेटवर्क अब लातूर पैटर्न के नाम से चर्चा में है। सीबीआई जांच से पहले स्थानीय पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस पूरे मॉड्यूल को लेकर कई अहम खुलासे किए थे। फिलहाल सीबीआई की एक टीम लगातार लातूर में डेरा डाले हुए है। एजेंसी ने मशहूर आरसीसी इंस्टीट्यूट के शिवराज मोटेगांवकर से भी पूछताछ की है। इसके अलावा कई छात्रों और उनके अभिभावकों से भी सवाल-जवाब किए गए हैं। जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड पीवी कुलकर्णी और मनीषा वाघमारे थे। दोनों ने मिलकर पुणे और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में छात्रों तक पहुंच बनाई। यह पूरा रैकेट एक संगठित सिंडिकेट की तरह काम कर रहा था, जो छात्रों की कमजोरियों और उनकी मजबूरियों का फायदा उठाता था।सूत्रों के अनुसार, इस नेटवर्क ने कई जगहों पर सेमिनार भी आयोजित किए। इसमें ज्यादातर पुराने छात्र एजेंट के तौर पर काम कर रहे थे, जिनमें बड़ी संख्या इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के छात्रों की बताई जा रही है।शुरुआती जांच में लातूर का नाम सामने नहीं आया था। लेकिन एक अभिभावक की शिकायत के बाद जिला पुलिस ने अपनी जांच की जानकारी सीबीआई को दी, जिसके बाद मामला तेजी से खुलता चला गया।वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पीवी कुलकर्णी नीट परीक्षा के पेपर सेट करने की प्रक्रिया में लंबे समय तक जुड़े रहे थे।
इसी वजह से अब उनसे 2024 के पेपर लीक मामले में भी पूछताछ की जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि पीवी कुलकर्णी के पास छात्रों का विस्तृत डेटा मौजूद था, जिसे उन्होंने मनीषा वाघमारे के साथ साझा किया। इसके बाद यह गैंग कोचिंग संस्थानों के मॉक टेस्ट के नतीजों के आधार पर कमजोर छात्रों की पहचान करता था और फिर उनसे संपर्क किया जाता था।
अमीर परिवारों के छात्रों से लाखों रुपए वसूले जाते थे, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों का इस्तेमाल सिर्फ माध्यम के तौर पर किया जाता था। यही वजह है कि पेपर पाने वाले छात्रों में कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने 25 लाख रुपए तक दिए, जबकि कुछ ने सिर्फ 25 हजार रुपए चुकाए।
पुणे पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नीट परीक्षा वाले दिन मनीषा वाघमारे के बैंक खाते में 10 लाख रुपए ट्रांसफर हुए थे। इसके अलावा कई छात्रों ने भी उसके खाते में 25-25 हजार रुपए जमा किए थे।
महाराष्ट्र में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के बड़े केंद्र के रूप में पहचान रखने वाला लातूर अपने शानदार रिजल्ट्स की वजह से लातूर पैटर्न के नाम से मशहूर रहा है। यहां सैकड़ों कोचिंग संस्थान चलते हैं और हर साल बड़ी संख्या में छात्र नीट पास करते हैं।
लेकिन अब यही लातूर पैटर्न पेपर लीक विवाद के बाद जांच एजेंसियों के निशाने पर आ गया है।
सीबीआई अब कई कोचिंग संस्थानों और उनके संचालकों से पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियों को शक है कि पीवी कुलकर्णी ने अपने पद और पहुंच का इस्तेमाल कर कुछ संस्थानों तक लीक पेपर पहुंचाए। फिलहाल जब्त दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैंक लेनदेन की फॉरेंसिक जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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