फॉच्यूनर की छुट्टी करने आ रही ये धाकड़ एसयूवी, मस्कुलर लुक और तगड़ा माइलेज देखकर आप भी हो जाएंगे दीवाने

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भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में इन दिनों निसान टेरानो पर बेस्ड एक नया कॉन्सेप्ट जबरदस्त चर्चा का विषय बना हुआ है। मस्कुलर लुक और बोल्ड स्टाइलिंग वाली यह एसयूवी हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। ऑटो बाजार में अब इस बात की जोरों पर चर्चा है कि निसान जल्द ही इस शानदार कॉन्सेप्ट पर आधारित एक नई प्रीमियम एसयूवी को भारत में लॉन्च कर सकती है, जो एसयूवी लवर्स के लिए एक बहुत बड़ा सरप्राइज साबित होने वाली है।
पोर्टफोलियो का हो रहा विस्तार, आएंगी ये नई कारें
भारतीय बाजार में अपनी स्थिति और पकड़ को मजबूत करने के लिए निसान पूरी तरह से तैयार है। फिलहाल कंपनी भारत में ‘टेक्टॉन’ (हृद्बह्यह्यड्डठ्ठ ञ्जद्गद्मह्लशद्म) एसयूवी लेकर आ रही है और जल्द ही इस कार का एक बड़ा थ्री-रो वर्जन भी बाजार में उतारा जाएगा। इन दोनों नई कारों के आने से कंपनी का पोर्टफोलियो काफी बढ़ जाएगा और इसके साथ ही ब्रांड के पास कुल चार मॉडल हो जाएंगे। हालांकि, कंपनी के पास जो चार मॉडल (मैग्नाइट, ग्रेवाइट, टेक्टॉन और टेक्टॉन थ्री रो) होंगे, वे सभी मुख्य रूप से रेनो की गाडिय़ों के प्लेटफॉर्म पर ही आधारित हैं।
फॉर्च्यूनर और ग्लॉस्टर को मिलेगी कांटे की टक्कर
निसान के मध्य पूर्व, सऊदी अरब, सीआईएस और भारत के प्रेसिडेंट थिएरी सब्बाग ने इशारों-इशारों में यह साफ कर दिया है कि कंपनी भारत में अपना कोई नया और बड़ा प्रोडक्ट लाने की योजना बना रही है। चर्चा है कि बीजिंग ऑटो शो में जिस टेरानो कॉन्सेप्ट को पेश किया गया था, उसे ही भारतीय बाजार में उतारा जा सकता है। अगर यह दमदार कार भारत आती है, तो इसका सीधा मुकाबला टोयोटा फॉर्च्यूनर और एमजी ग्लॉस्टर जैसी दिग्गज एसयूवी से होगा। सबसे खास बात यह है कि प्लगइन हाइब्रिड अवतार में आने के कारण इस कार का माइलेज आम एसयूवी के मुकाबले कहीं ज्यादा शानदार होगा।
चीनी पार्टनर डोंगफेंग के साथ मिलकर हो रही खास तैयारी
निसान इस प्रीमियम कार को अपने चीनी पार्टनर डोंगफेंग के साथ मिलकर तैयार कर सकती है। दोनों कंपनियां चीन में एक जॉइंट वेंचर चलाती हैं और वहां गाडिय़ां बनाना काफी किफायती होता है। चीन में व्हीकल डेवलपमेंट की रफ्तार भी बेहद तेज है। जहां आमतौर पर किसी नई कार को तैयार करने में साठ महीने तक का लंबा समय लगता है, वहीं निसान-डोंगफेंग जॉइंट वेंचर महज तीस महीनों में नया मॉडल तैयार करने की क्षमता रखता है। चीन में बनी गाडिय़ां आमतौर पर बेहतरीन और हाई-टेक फीचर्स से लैस होती हैं, जो भारतीय ग्राहकों को खूब पसंद आती हैं।
चेन्नई प्लांट में आसानी से हो सकेगा प्रोडक्शन
भारत में इस नई एसयूवी की कामयाबी के लिए इसकी लोकल मैन्युफैक्चरिंग होना सबसे ज्यादा जरूरी है। हालांकि निसान के पास अब चेन्नई प्लांट में सीधे तौर पर हिस्सेदारी नहीं है, जिसे वह पहले रेनो के साथ साझा करती थी, लेकिन अभी भी उसके पास सालाना 2.5 लाख यूनिट के उत्पादन का अधिकार सुरक्षित है। इस विशाल प्लांट की कुल प्रोडक्शन कैपेसिटी हर साल पांच लाख यूनिट की है, जिसका फिलहाल पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं हो रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि डोंगफेंग रेंज की इन नई गाडिय़ों का निर्माण इस प्लांट में बेहद आसानी से किया जा सकेगा।

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