गर्मी के बढ़ते प्रकोप के बीच जहां लोग घरों में रहकर ऑनलाइन ग्रॉसरी और फूड ऑर्डर करना पसंद कर रहे हैं, वहीं डिलीवरी करने वाले गिग वर्कर्स तेज धूप और लू में लगातार काम करने को मजबूर हैं। मिनटों में सुविधा देने वाले ये डिलीवरी पार्टनर्स खुद गंभीर स्वास्थ्य जोखिम झेल रहे हैं, जिसे लेकर अब आवाज उठने लगी है।
इसी मुद्दे पर ने केंद्र सरकार से ठोस हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को पत्र लिखकर गिग वर्कर्स के लिए सख्त सुरक्षा मानक लागू करने की अपील की है।
क्या हैं मुख्य मांगें?
तेजी से बढ़ते तापमान को देखते हुए ढ्ढस्न्रञ्ज ने कई अहम प्रस्ताव रखे हैं:
सवेतन कूलिंग ब्रेक: द्वारा ऑरेंज या रेड अलर्ट जारी होने पर हर 2 घंटे के काम के बाद कम से कम 20 मिनट का पेड ब्रेक दिया जाए।
पेनल्टी से राहत: गर्मी के कारण काम रोकने या देरी होने पर वर्कर्स की रेटिंग कम न हो और उनकी आईडी ब्लॉक न की जाए।
जरूरी सुविधाएं: ऐप कंपनियां पीने का पानी, ह्रक्रस् और कूलिंग सेंटर की जानकारी ऐप में उपलब्ध कराएं।
इमरजेंसी फीचर: ऐप में ‘हीट डिस्ट्रेस’ बटन हो, जिससे जरूरत पडऩे पर तुरंत मेडिकल सहायता मिल सके।
कानूनी प्रावधान की मांग
संगठन ने 2020 के तहत इन सुरक्षा उपायों को लागू करने की मांग की है। साथ ही की मौजूदा एडवाइजरी को अनिवार्य नियमों में बदलने की अपील की गई है।
एल्गोरिदम के दबाव में काम
के राष्ट्रीय महासचिव का कहना है कि डिलीवरी और राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम का दबाव इतना अधिक होता है कि वर्कर्स भीषण गर्मी में भी काम करने को मजबूर रहते हैं। इससे उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है।
समय की मांग
विशेषज्ञों का मानना है कि देशभर में लगातार बढ़ती गर्मी को देखते हुए सडक़ पर काम करने वाले लाखों गिग वर्कर्स के लिए ठोस सुरक्षा उपाय लागू करना बेहद जरूरी हो गया है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इन मांगों पर कितना और कब तक अमल करती है।








