तिरुपति में भक्तों के लिए नि:शुल्क तिरुनामधारण सेवा फिर से शुरू

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तिरुपति, (आरएनएस)। एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पहल के तहत तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ने तिरुनामधारण सेवा को पुनर्जीवित किया है. यह एक पवित्र प्रथा है, जिसका उद्देश्य भगवान वेंकटेश्वर के पवित्र मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले तीर्थयात्रियों के भक्ति अनुभव को और अधिक गहराई से जोड़ता है।
यह सेवा जिसमें भक्तों के माथे पर पारंपरिक तिरुनामम (तीन-धारी तिलक) लगाया जाता है, अब नि:शुल्क उपलब्ध है. यह पहल जो कोविड-19 महामारी के बीच पिछली सरकार के दौरान बंद कर दी गई थी, अब सनातन धर्म और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देने पर नए सिरे से ध्यान देने के साथ फिर से शुरू की गई है।
अब भक्तों का दर्शन के लिए लाइन में लगने से पहले पवित्र निशानों से स्वागत किया जाता है, जो भगवान गोविंदा के पास जाते समय पवित्रता और भक्ति का प्रतीक है. लगभग 168 श्रीवारी सेवक प्रतिदिन इस सेवा में सक्रिय रूप से लगे रहते हैं और तिरुमाला के प्रमुख स्थानों पर दो पालियों में काम करते हैं।
इन स्थानों में वैकुंठम कतार परिसर 1 और 2, गोल्ला मंडपम, बेदी अंजनेय स्वामी मंदिर, कल्याणकट्टा, वराहस्वामी मंदिर, सुपथम, राम बगीचा, अन्नप्रसादम केंद्र और चार माडा गलियां शामिल हैं. पवित्र तिरुनामम लाल सिंदूर का उपयोग करके लगाया जाता है, जिसके लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए सांचों (जिन्हें नामाकोपुस कहा जाता है) का इस्तेमाल किया जाता है.
इससे एकरूपता और पारंपरिक प्रामाणिकता सुनिश्चित होती है. यह शैली तिरुमानिकापु सजावट की तरह ही है, जिसे सप्ताह में एक बार पूरे विधि-विधान के साथ देवता को लगाया जाता है. भक्तों का मानना है कि भौंहों के बीच आज्ञा चक्र पर तिलक लगाने से न सिर्फ आध्यात्मिक ध्यान बढ़ता है, बल्कि बुरे असर से भी बचाव होता है. तीर्थयात्रियों का रिस्पॉन्स बहुत अच्छा रहा है, और कई लोगों ने इस रस्म में हिस्सा लेकर खुशी ज़ाहिर की है.श्रीवारी सेवक जो अपनी मजऱ्ी से यह सेवा करते हैं, इस अनुभव को बहुत अच्छा बताते हैं. एक सेवक ने बताया, इस पवित्र तरीके से भक्तों की सेवा करके हमें बहुत खुशी मिलती है. इस नई शुरुआत के साथ टीटीडी परंपरा को भक्ति के साथ मिलाने की अपनी कोशिशें जारी रखे हुए है, ताकि यह पक्का हो सके कि तिरुमाला

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