अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि वह ईरान के साथ चल रहे सीजफायर को आगे नहीं बढ़ा सकते हैं. इससे इस बात की संभावना बढ़ गई है कि अगर पश्चिम एशिया में युद्ध को पूरी तरह से रोकने के लिए इस्लामिक रिपब्लिक के साथ कोई समझौता नहीं हो पाता है तो इस क्षेत्र में फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू हो सकती है.
ट्रंप ने कहा कि यह फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या सीजफायर की समय सीमा से पहले कोई समझौता हो पाता है. उन्होंने आगे कहा कि अगर सीजफायर का समझौता नहीं भी हो पाता है तो भी ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, हो सकता है कि मैं इसे आगे न बढ़ाऊँ लेकिन नाकेबंदी जारी रहेगी. हालाँकि हो सकता है कि मैं इसे आगे न बढ़ाऊँ तो, नाकेबंदी तो रहेगी ही और बदकिस्मती से हमें फिर से बम गिराना शुरू करना पड़ेगा.
ट्रंप इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि अगर बुधवार, 22 अप्रैल तक कोई डील नहीं हुई, तो क्या सीजफायर बढ़ाया जाएगा, क्योंकि मौजूदा दो हफ़्ते का सीजफायर उसी दिन खत्म होने वाला है. इन बातों से अमेरिका के कड़े रुख का पता चलता है, जिसमें ट्रंप ने साफ किया कि ब्लॉकेड तो जारी रहेगा, लेकिन युद्ध में रुकावट शायद न आए.
रिपोर्ट के अनुसार प्रतिनिधिमंडल के रविवार को पाकिस्तान की राजधानी पहुंचने की संभावना है. इस दौरे का मकसद दोनों पक्षों के बीच किसी संभावित समाधान के लिए जमीन तैयार करना है, क्योंकि इससे पहले हुई बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई थी.
11 अप्रैल से 12 अप्रैल तक इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता, अमेरिका और ईरान के बीच एक महीने से ज़्यादा समय से चल रही युद्ध को खत्म करने की एक ऐतिहासिक, लेकिन बेनतीजा कूटनीतिक कोशिश थी. पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुई यह बातचीत, 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से दोनों देशों के बीच पहली उच्च-स्तरीय, आमने-सामने की बातचीत थी.








