नई दिल्ली (आरएनएस)। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर रूसी कच्चे तेल की खरीद एक बार फिर चर्चा में है। इस मुद्दे पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी आधार पर सभी फैसले लिए जाते हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बाज़ार परिस्थितियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की नीति पर काम कर रहा है। हालांकि, सरकार ने यह साफ तौर पर नहीं कहा कि रूस से तेल की खरीद जारी रहेगी या नहीं। रूसी तेल को लेकर उठ रहे सवालों पर सरकार अब तक हां या ना में कोई स्पष्ट जवाब देने से बचती रही है। वाणिज्य मंत्रालय इस मुद्दे को विदेश मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र का विषय बताता है। शनिवार को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी मीडिया के सवाल पर कहा कि इसका जवाब विदेश मंत्रालय ही देगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने शनिवार को मीडिया के बार-बार पूछे जाने पर गुरुवार की साप्ताहिक ब्रीफिंग में दिए गए बयान को दोहराया। उन्होंने कहा कि सरकार कई बार सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर चुकी है कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर ऊर्जा आयात से जुड़े फैसले लिए जाते हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत दंडात्मक आयात शुल्क को हटा दिया है।
अमेरिका का दावा- रूस से तेल खरीद बंद करेगा भारत
अमेरिका, भारत के साथ अंतरिम व्यापार समझौते की घोषणा के बाद से लगातार यह दावा करता रहा है कि भारत ने रूस से तेल की खरीद रोकने की प्रतिबद्धता जताई है। शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संबंध में एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर रूस से तेल खरीद को लेकर लगाए गए 25 प्रतिशत शुल्क को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया।
आदेश में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उन्हें भारत के प्रयासों को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों से अतिरिक्त जानकारी और सिफारिशें मिली हैं। उनके अनुसार, भारत ने रूसी संघ से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तेल आयात बंद करने, अमेरिका से ऊर्जा उत्पाद खरीदने और अगले दस वर्षों में रक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।
कूटनीतिक संतुलन की कसौटी
फिलहाल, भारत की ओर से आधिकारिक तौर पर रूस से तेल आयात बंद करने की पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में यह साफ है कि भारत एक ओर अमेरिका के साथ व्यापारिक और रणनीतिक संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को लेकर संतुलन बनाए रखने की नीति पर कायम है।








