भोपाल, (निप्र.) । मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता कमलनाथ ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में हालिया न्यायाधीश नियुक्तियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में न्यायपालिका आखिरी उम्मीद की संस्था है, लेकिन जब अदालत में पूर्व सरकारी वकीलों की बड़ी संख्या बैठती है, तो आम नागरिकों के मन में निष्पक्षता को लेकर स्वाभाविक संदेह पैदा होता है। कमलनाथ ने शनिवार को सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर कहा- लोकतंत्र में न्यायपालिका वह संस्था मानी जाती है, जहाँ सत्ता के अत्याचार के खिलाफ आखऱिी उम्मीद बची रहती है। आम नागरिक यह विश्वास करता है कि अदालतें सरकार से ऊपर उठकर, बिना किसी दबाव या झुकाव के, केवल संविधान और न्याय के आधार पर फ़ैसले देंगी। लेकिन जब न्यायपालिका की संरचना ही सत्ता के पूर्व पैरोकारों से भरती दिखाई दे, तो यह विश्वास गहरे संकट में पड़ जाता है।उन्होंने आगे कहा कि हालिया तथ्य यह संकेत देते हैं कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में नियुक्त जजों का एक बड़ा हिस्सा पहले सरकार के वकील के रूप में काम कर चुका है। यह कोई मामूली संयोग नहीं है, बल्कि ऐसी स्थिति है जो न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सीधा सवाल खड़ा करती है। वर्षों तक सरकार का पक्ष रखने, उसकी नीतियों और निर्णयों का बचाव करने के बाद अचानक उसी सरकार के मामलों में निष्पक्ष निर्णय देने की अपेक्षा करना स्वाभाविक रूप से संदेह को जन्म देता है।








