इंदौर,(आरएनएस)। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को इलाज के दौरान एक महिला और एक पुरुष की मौत के बाद इस घटना में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है। मृतकों में 82 वर्षीय विद्याबाई यादव और 63 वर्षीय बद्रीप्रसाद शामिल हैं। इधर, बद्रीप्रसाद की मौत के बाद शनिवार को परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों ने भागीरथपुरा पुल के पास शव सड़क पर रखकर चक्काजाम कर दिया। इस दौरान क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई। प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय भाजपा पार्षद कमल वाघेला के खिलाफ नारेबाजी की और प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। मौके पर कांग्रेस नेता चिंटू चौकसे, राजू भदौरिया, अमित पटेल, दीपू यादव सहित अन्य नेता भी पहुंचे।
परिजनों का आरोप है कि बद्रीप्रसाद की मौत को एक दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक कोई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। परिवार का कहना है कि वे बेहद गरीब हैं और अंतिम संस्कार के लिए भी उनके पास पैसे नहीं हैं। परिजनों ने बताया कि बद्रीप्रसाद पूरी तरह स्वस्थ थे और अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी। इसके बावजूद प्रशासन इस मौत को दूषित पानी से जोडऩे से इनकार कर रहा है। परिजनों ने यह भी बताया कि दो महीने पहले बद्रीप्रसाद की बहू की भी मौत हो चुकी है, जिससे परिवार पहले से ही सदमे में है। लगातार हो रही मौतों, प्रशासन की धीमी प्रतिक्रिया और पीडि़त परिवारों को राहत न मिलने से क्षेत्र में भारी आक्रोश है। हंगामे की सूचना मिलते ही क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो। पीडि़त परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए।
मरीजों की स्थिति और प्रशासनिक दावा
प्रशासन के अनुसार अब तक दूषित पानी से बीमार होकर 450 से अधिक मरीज अस्पतालों में भर्ती हो चुके हैं। फिलहाल 10 मरीजों का इलाज जारी है, जिनमें से एक मरीज वेंटिलेटर पर और एक आईसीयू में है, जबकि वार्ड में भर्ती 8 मरीजों की हालत स्थिर बताई जा रही है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर अब डायरिया के मरीज भी एक- दो ही पहुंच रहे हैं, जिन्हें भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ रही।








