धार, (ए.)। मध्य प्रदेश के धार जिला स्थित ऐतिहासिक और विवादित धार्मिक स्थल भोजशाला में शुक्रवार को पूजा और नमाज एक साथ शांतिपूर्ण ढंग से हुई। उच्चतम न्यायालय ने हिन्दू और मुस्लिम पक्ष को पूजा व नमाज कीइजाजत देने के साथ प्रशासन को निर्देश दिए थे। बसंत पंचमी के अवसर पर हुए इस आयोजन को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया और कड़े सुरक्षा इंतजामों, प्रशासनिक निगरानी तथा व्यापक पुलिस बल की मौजूदगी में पूरे दिन धार्मिक गतिविधियां संचालित की गईं। शुक्रवार सुबह सूर्योदय से पहले ही भोजशाला परिसर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे मां वाग्देवी के दर्शन के लिए पहुंचे। मंदिर परिसर को फूलों से सजाया गया और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजा-अर्चना, हवन और पाठ प्रारंभ हुए, जो पूरे दिन सूर्यास्त तक जारी रहे। परिसर के भीतर और बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं।पुलिस बल और स्वयंसेवकों ने मोर्चा संभालते हुए दर्शन व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाए रखा। श्रद्धालुओं ने प्रशासन की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि इतने संवेदनशील विषय के बावजूद पूजा-हवन पूरी श्रद्धा और सौहार्द के वातावरण में हो रहा है। बसंत पंचमी के अवसर पर धार शहर में शोभायात्रा भी निकाली गई, जो शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई भोजशाला पहुंची। इसके बाद राजा भोज स्मृति बसंतोत्सव समिति की ओर से सभा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने मां वाग्देवी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। प्रवेश द्वार पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए समिति की ओर से एक बड़ा घंटा भी स्थापित किया गया। दर्शन के दौरान लंबी कतारें लगी रहीं, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस और स्वयंसेवकों को लगातार सक्रिय रहना पड़ा इस बीच वाग्देवी के चित्र को साइड गेट से भीतर ले जाने को लेकर कुछ समय के लिए असहमति की स्थिति भी बनी। हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई, जिसके बाद प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में वाग्देवी का चित्र भोजशाला परिसर के भीतर विधिवत ले जाया गया। एहतियातन इस दौरान सभी गेटों को घेर लिया गया और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था उत्पन्न न हो। स्थिति को संभालते हुए प्रशासन ने संयम और सतर्कता का परिचय दिया। दोपहर के समय उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार मुस्लिम समाज के लिए निर्धारित समय में नमाज की व्यवस्था की गई। दोपहर करीब एक बजे मुस्लिम समाज के लोगों को पुलिस वैन के माध्यम से भोजशाला परिसर के तय स्थान पर लाया गया। लगभग दो बजे नमाज शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई, जिसके बाद सभी नमाजियों को पुलिस व्यवस्था के बीच वापस बाहर लाया गया। जिला प्रशासन ने बताया कि नमाज पूरी तरह नियत स्थान और समय में कराई गई तथा नमाजियों को विशेष सुरक्षा के बीच लाया और ले जाया गया। प्रशासन की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्सÓ पर पोस्ट कर जानकारी दी गई कि दोनों समुदायों के धार्मिक कार्यक्रम बिना किसी व्यवधान के संपन्न हुए हैं और सभी से शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की गई। हालांकि नमाज को लेकर अलग-अलग दावे भी सामने आए। गुलमोहर कॉलोनी के कुछ निवासियों और मुस्लिम समाज के लोगों का आरोप है कि उन्हें कमाल मौला मस्जिद में नमाज पढऩे की अनुमति होने के बावजूद लंबे समय तक रोके रखा गया और दोपहर दो बजे तक नमाज नहीं पढ़वाई गई। इन आरोपों के बीच सोशल मीडिया पर दो वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें पीले रंग की ‘वॉलेंटियरÓ जैकेट पहने कुछ लोग नमाज की तैयारी करते और बाद में लौटते हुए दिखाई दे रहे हैं। इन वीडियो के आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि कमाल मौला मस्जिद में नमाज अदा की गई। प्रशासन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उच्चतम न्यायालय के आदेशों का पूरी तरह पालन किया गया है और किसी भी समुदाय के साथ कोई भेदभाव नहीं किया गया। पूरे दिन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। भोजशाला परिसर और आसपास के क्षेत्रों में चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती रही। रैपिड एक्शन फोर्स के जवान भी मौके पर मौजूद रहे। पूरे क्षेत्र को छह सेक्टरों और धार शहर को सात जोन में बांटा गया। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लगातार निगरानी की गई, जबकि हाईटेक कंट्रोल रूम से वरिष्ठ अधिकारी हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए थे। भोजशाला परिसर के 300 मीटर के दायरे को नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया, जहां ड्रोन, यूएवी और अन्य उड़ान गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध रहा।








