14 दिन, 2000 मौतें; सरकार के इस खौफनाक कबूलनामे ने दुनिया के उड़ाए होश

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तेहरान (आरएनएस)। ईरान सुलग रहा है। पिछले दो हफ्तों से जारी विरोध प्रदर्शन अब ‘नरसंहार’ में तब्दील होते दिख रहे हैं। दुनिया भर को जिस बात का डर था, आखिरकार ईरान सरकार ने वही खौफनाक सच कबूल कर लिया है। एक ईरानी अधिकारी ने मंगलवार को आधिकारिक तौर पर माना कि देशव्यापी हिंसा में अब तक 2,000 लोगों की मौत हो चुकी है। यह पहली बार है जब ईरान की कट्टरपंथी सरकार ने इतनी बड़ी संख्या में मौतों के आंकड़े को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है।ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स को दी जानकारी में दावा किया कि सडक़ों पर बिछ रही लाशों के लिए तथाकथित ‘आतंकवादी’ जिम्मेदार हैं। सरकार ने अपनी दलील में कहा कि मरने वालों में सिर्फ आम नागरिक या प्रदर्शनकारी ही नहीं, बल्कि सुरक्षा बलों के जवान भी शामिल हैं। हालांकि, अधिकारी ने यह साफ नहीं किया कि मरने वालों में कितने निहत्थे प्रदर्शनकारी थे और कितने वर्दीधारी जवान। सरकार का कहना है कि जिसे वो ‘आतंकवादी’ मानती है, अब उन्हीं का इन प्रदर्शनों पर कब्जा हो चुका है।खराब आर्थिक हालातों की वजह से शुरू हुआ यह विरोध अब 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से सत्ता में काबिज सरकार के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गया है। सरकार दोहरी चाल चल रही है—एक तरफ आर्थिक मुद्दों पर जनता के गुस्से को जायज बता रही है, तो दूसरी तरफ उन पर गोलियां बरसा रही है। अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए ईरान ने फिर से अमेरिका और इजरायल पर हिंसा भडक़ाने का आरोप लगा दिया है।मानवाधिकार संगठनों ने पहले ही हजारों गिरफ्तारियों और सैकड़ों मौतों की आशंका जताई थी, लेकिन सरकारी आंकड़ा (2000 मौतें) उससे कहीं ज्यादा भयावह है। सरकार ने सच को दबाने के लिए इंटरनेट बंद कर रखा है, जिससे सही जानकारी बाहर नहीं आ पा रही है। लेकिन, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो में रात के अंधेरे में गोलियों की तड़तड़ाहट, जलती हुई इमारतें और वाहनों को देखा जा सकता है, जो वहां के गृहयुद्ध जैसे हालात बयां कर रहे हैं।

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