न मोबाइल पास रखते हैं, न इंटरनेट चलाते हैं; एनएसए अजीत डोभाल के खुलासे से सब हैरान

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नई दिल्ली (आरएनएस)। आज के डिजिटल युग में जहां मोबाइल फोन और इंटरनेट के बिना एक पल बिताना भी मुश्किल लगता है, वहां देश की सुरक्षा के सबसे बड़े पहरेदार ने एक ऐसा खुलासा किया है जिसने सबको हैरत में डाल दिया है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने बताया है कि वह आज भी मोबाइल फोन और इंटरनेट का उपयोग नहीं करते हैं। शनिवार को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डोभाल ने युवाओं के सामने अपनी यह अनोखी आदत साझा की।
‘संचार के और भी तरीके हैं’
डोभाल ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि फोन और इंटरनेट ही संवाद के एकमात्र माध्यम नहीं हैं। संपर्क करने के ऐसे कई अन्य तरीके हैं जिनके बारे में ज्यादातर लोगों को पता तक नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल अत्यंत विशेष परिस्थितियों में ही फोन का उपयोग करते हैं, जैसे कि विदेश में रहने वाले लोगों या अपने परिवार से बात करने के लिए। उन्होंने युवाओं को धैर्य का पाठ पढ़ाते हुए नसीहत दी कि संदेश हमेशा ईमानदारी से संप्रेषित होने चाहिए, न कि किसी प्रोपेगेंडा के माध्यम से।
पाकिस्तान में 7 साल रहे ‘अंडरकवर’
अजीत डोभाल का जीवन किसी थ्रिलर फिल्म की पटकथा से कम नहीं है। 1945 में उत्तराखंड में जन्मे और केरल कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी डोभाल भारत के 5वें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। उनके करियर के किस्से आज भी सुरक्षा हलकों में मशहूर हैं। कहा जाता है कि उन्होंने पाकिस्तान में एक ‘अंडरकवर’ एजेंट के रूप में भेष बदलकर 7 साल बिताए, जहां उन्होंने चरमपंथी समूहों की खुफिया जानकारी इक_ा की। इसके बाद उन्होंने इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग में 6 साल तक काम किया। मिजोरम और पंजाब में उग्रवाद के खिलाफ जमीनी स्तर पर उनकी भूमिका बेहद अहम रही है।
सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर कंधार कांड तक
डोभाल भारत के इतिहास में ‘कीर्ति चक्र’ पाने वाले सबसे युवा पुलिस अधिकारी हैं। देश की सुरक्षा को लेकर उनका रुख हमेशा सख्त रहा है। सितंबर 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक की योजना बनाने और उन्हें सफलतापूर्वक अंजाम देने में उनकी मुख्य भूमिका रही है। डोकलाम विवाद को सुलझाने में भी वे अग्रणी रहे। इसके अलावा 1971 से 1999 के बीच उन्होंने इंडियन एयरलाइंस के कम से कम 15 अपहरण मामलों को सुलझाया। 1999 के कुख्यात कंधार विमान अपहरण (ढ्ढष्ट-814) कांड में वे भारत की ओर से मुख्य वार्ताकारों में से एक थे।
आजादी की भारी कीमत चुकाई है देश ने
कार्यक्रम में युवा नेताओं को संबोधित करते हुए डोभाल थोड़े भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी आजादी के लिए बहुत भारी कीमत चुकाई है। पिछली कई पीढिय़ों ने इसके लिए भारी नुकसान और कठिनाइयां झेली हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे भारत के समृद्ध इतिहास और उसकी उन्नत सभ्यता से प्रेरणा लें। डोभाल ने युवाओं का आह्वान किया कि वे देश के मूल्यों, अधिकारों और विश्वासों के आधार पर एक शक्तिशाली भारत का निर्माण करें।

 

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