‘सख्ती से रोको..’, बांग्लादेश में 5 हिंदुओं की हत्या, भारत ने यूनुस सरकार को दी चेतावनी

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नई दिल्ली (ए.)। बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनने के बाद से ही हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। बीते एक महीने से भी कम समय में कम-से-कम पांच हिंदुओं की हत्या हो चुकी है। इस दौरान मंदिरों में तोडफ़ोड़, हिंदुओं के घरों और व्यवसायों पर हमले तथा सरकारी नौकरियों में कार्यरत हिंदुओं से जबरन इस्तीफे जैसे आरोप भी लगे हैं। इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए भारत सरकार ने शुक्रवार को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को साफ शब्दों में कहा कि वह देश में हो रही सांप्रदायिक हिंसा पर तुरंत और सख्ती से रोक लगाए।
विदेश मंत्रालय की कड़ी टिप्पणी
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, हम अल्पसंख्यकों के साथ-साथ उनके घरों और व्यवसायों पर चरमपंथी तत्वों द्वारा किए जा रहे बार-बार के हमलों को लेकर बेहद चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से सख्ती से और बिना देर किए निपटना जरूरी है। जायसवाल ने यह भी चिंता जताई कि इन मामलों को व्यक्तिगत दुश्मनी, राजनीतिक मतभेद या बाहरी कारणों से जोडक़र नजरअंदाज करने की प्रवृत्ति देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे अपराधियों का हौसला बढ़ता है और अल्पसंख्यकों में भय और असुरक्षा की भावना और गहरी होती है।
एक महीने में पांच हिंदुओं की हत्या
पिछले महीने 18 दिसंबर को एक गारमेंट फैक्ट्री में काम करने वाले दीपू चंद्र दास की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। आरोप है कि हत्या के बाद शव को पेड़ से लटकाकर आग लगा दी गई। इस मामले में अब तक कम से कम 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।इसके बाद 24 दिसंबर को राजबाड़ी जिले के पांग्शा उप-जिले में अमृत मंडल की कथित तौर पर जबरन वसूली के आरोप में हत्या कर दी गई। 31 दिसंबर की रात दुकान बंद कर घर लौट रहे 50 वर्षीय व्यापारी खोकोन चंद्र दास पर धारदार हथियार से हमला किया गया और उन्हें आग के हवाले कर दिया गया। तीन जनवरी को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।पांच जनवरी को नरैल के निवासी और ‘दैनिक बीडी खबर’ के कार्यवाहक संपादक राणा प्रताप बैरागी की जेस्सोर जिले में गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसी रात पलाश उप-जिले के चारसिंदूर बाजार में किराना दुकानदार मोनी चक्रवर्ती की भी धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी गई।
अल्पसंख्यकों में बढ़ती चिंता
अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के सत्ता से हटने के बाद से बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें हिंदू समुदाय सबसे अधिक प्रभावित हुआ है वर्ष 2022 की जनगणना के अनुसार, बांग्लादेश में करीब 1.31 करोड़ हिंदू रहते हैं, जो देश की कुल आबादी का लगभग 7.95 प्रतिशत हैं। लगातार हो रही हिंसा की घटनाओं से वहां के हिंदू समुदाय में गहरी चिंता और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

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