न्यायालय के फैसले को दरकिनार कर अरावली में नए पट्टे बांट रही है भजनलाल सरकार : अशोक गहलोत

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जयपुर (ए.)। गहलोत ने एक बयान में कहा कि केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव दावा कर रहे हैं कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार जब तक मैनेजमेंट प्लान फॉर सस्टेनेबल माइनिंग (एमपीएसएम) तैयार नहीं हो जाता तब तक अरावली की 100 मीटर से ऊंची या नीची, किसी भी पहाड़ी पर नया खनन पट्टा नहीं दिया जाएगा। लेकिन, राजस्थान सरकार ने 14 नवंबर 2025 को नए खनन पट्टे जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जिसमें 50 पट्टे अरावली रेंज वाले नौ जिलों जयपुर, अलवर, झुंझुनूं, राजसमंद, उदयपुर, अजमेर, सीकर, पाली और ब्यावर के हैं। उन्होंने कहा, 20 नवंबर को आए उच्चतम न्यायालय के फैसले के बावजूद, अरावली रेंज में आने वाले 50 खनन पट्टों की नीलामी प्रक्रिया को नहीं रोका गया बल्कि 30 नवंबर 2025 को आदेश निकालकर प्रमाणित किया गया कि अरावली रेंज में आने के बावजूद ये 50 पट्टे अरावली का हिस्सा नहीं हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि जब उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट रूप से एमपीएसएम के बिना नए पट्टों पर रोक लगाई है तो राजस्थान सरकार किस आधार पर नीलामी जारी रख रही है? सरकार ने उच्च न्यायालय में यह तर्क देकर दिसंबर में इन पट्टों की नीलामी कर दी की है कि ये पहाड़ 100 मीटर से नीचे हैं, इसलिए अरावली में नहीं आते जबकि उच्चतम न्यायालय का एमपीएसएम का फैसला 100 मीटर से ऊपर व नीचे दोनों की पहाडिय़ों पर लागू होगा। उन्होंने कहा, यह न केवल उच्चतम न्यायालय के फैसले की मंशा के खिलाफ है, बल्कि अरावली के अस्तित्व को मिटाने की एक बड़ी साजिश भी है। पूर्व मुख्यमंत्री के अनुसार, यह एक उदाहरण है कि आने वाले दिनों में उच्चतम न्यायालय के फैसले की आड़ में कैसे तकनीकी रास्ते निकालकर पूरे अरावली में खनन का प्रयास किया जाएगा। गहलोत ने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा दो दिन से अरावली बचाने के भाषण दे रहे हैं परन्तु उनके गृह जिले के भरतपुर के पड़ोसी डीग में साधु-संत अवैध खनन के खिलाफ धरने पर बैठे हैं।

 

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