नई दिल्ली,(आरएनएस) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा आर्थिक निवेश और विकास के प्रमुख चालकों में से एक है और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी के बिना 21वीं सदी की जटिल सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावी ढंग से नहीं निपटा जा सकता। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि नागरिक कल्याण और जन सहभागिता को केंद्र में रखकर ही सुरक्षित, समृद्ध और विकसित भारत का निर्माण संभव है।
राष्ट्रपति मंगलवार को यहां आयोजित इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) शताब्दी एंडोमेंट व्याख्यान को ‘जन-केंद्रित राष्ट्रीय सुरक्षा: विकसित भारत के निर्माण में सामुदायिक भागीदारी’ विषय पर संबोधित कर रही थीं। राष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से इंटेलिजेंस ब्यूरो ने देश की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने, जनता की रक्षा करने और भारत की एकता व अखंडता को मजबूत बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय भूमिका निभाई है। उन्होंने इसे देश के लिए गर्व का विषय बताया।
राष्ट्रपति ने कहा कि यह विषय वर्तमान समय के साथ-साथ भविष्य के लिए भी अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सरकार या सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। सतर्क और जागरूक नागरिक सुरक्षा एजेंसियों के प्रयासों को मजबूत समर्थन प्रदान कर सकते हैं। जब नागरिक समुदाय के रूप में संगठित होकर कार्य करते हैं, तो उनमें असाधारण समन्वय और प्रभाव उत्पन्न होता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में वर्णित मौलिक कर्तव्यों में से कई राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़े हैं। छात्रों, शिक्षकों, मीडिया, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों, नागरिक समाज संगठनों और अन्य सामाजिक समूहों की भूमिका इन कर्तव्यों के प्रचार-प्रसार में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रपति ने कहा कि जन सहभागिता राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाती है। देश में ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जहां सतर्क नागरिकों द्वारा दी गई सूचनाओं से गंभीर सुरक्षा संकटों को टालने में मदद मिली। राष्ट्रीय सुरक्षा की आधुनिक अवधारणा में जनता को केंद्र में रखा जाना चाहिए। नागरिकों को केवल घटनाओं का दर्शक नहीं, बल्कि अपने आसपास और उससे आगे के क्षेत्रों की सुरक्षा में सक्रिय भागीदार बनना चाहिए। ‘जन भागीदारी’ जन-केंद्रित सुरक्षा की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि पुलिस और आंतरिक सुरक्षा एजेंसियों को सेवा-भाव के साथ कार्य करना होगा। जनता का विश्वास अर्जित करना जन-केंद्रित राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति की पूर्व शर्त है। विश्वास के बिना समुदाय की भागीदारी संभव नहीं है। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत आज बहुआयामी सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। सीमा क्षेत्रों में तनाव, आतंकवाद, उग्रवाद, अलगाववाद और सांप्रदायिक कट्टरता पारंपरिक सुरक्षा चिंताएं रही हैं।
इसके साथ ही हाल के वर्षों में साइबर अपराध एक गंभीर और तेजी से बढ़ती चुनौती बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि देश के किसी भी हिस्से में असुरक्षा का प्रभाव पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। सुरक्षित भारत के बिना समृद्ध भारत संभव नहीं है।








