20 हजार पहले उसके बाद 70 हजार देने की बात हो रही थी
नर्मदापुरम (निप्र)। अंतरजातीय विवाह योजना के तहत मिलने वाली 2 लाख रुपए की राशि दिलाने के एवज में डीलिंग बाबू मनोज सोनी के द्वारा 90 हजार की मांग की जा रही थी। इसका वीडियो वायरल हो रहा है। घूसखोरी के आरोप में लोकायुक्त ने क्लर्क मनोज सोनी को 10 हजार रूपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा है। जनजातीय कार्य विभाग के इस लिपिक के द्वारा रिश्वत मांगते हुए कैमरे में कैद हुआ है। लोकायुक्त ने उसे रंगे हाथों पकड़ा है। लेकिन उससे पहले ही उसका डील करते हुए वीडियो सामने आ आया है। पिछले कुछ माह में ही लोकायुक्त ने दो मामले रिश्वतखोरी के पकड़े है। यह तो सामने आ गए। जागरूक लोगों ने बहुत हिम्मत करके पकड़वाने में होसला दिखाया है। लेकिन ऐसे चतुर और चालक हैं कि उनको नहीं पकड़ा जा सकता है। वे रिश्वत लेते जरूर हैं लेकिन सीधे नहीं लेते एजेंटों या दलालों के माध्यम से रिश्वत का खेल लंबे समय से चल रहा है। इसमें लोकायुक्त कुछ सरल तरीके निकाले तो और भी अनेक मगरमछ, और कई मछलियां पकड़ा सकते हैं। लेकिन वे इतने शातिर तरीके से रिश्वत लेते हैं कि उनको सीधे सीधे पकडऩा मुश्किल ही नहीं टेडी खीर है।
बनते बहुत ईमानदार, बिना सेवा शुल्क नहीं होते काम
मुख्यालय के अनेक कार्यालय ऐसे हैं जहां पर कर्ता धर्ता सहित उनके मातहत बिना रिश्वत के लेन देने वाले कार्य नहीं करते हैं। जबकि वे बहुत ईमानदार बनते हैं। लेकिेन कितने ईमानदार हैं यह बात कभी कभार लोकायुक्त जैसी कार्रवाई के चलते समाने आ जाती है।
अब और ज्यादा सतर्क हो गए
हाल के दिनों में रिश्वत कांड उजागर होने से अनेक विभाग के घूसखोरों में बैचेनी बनी हुई है। अब वे कुछ सतर्क हो गए हैं। सीधे नहीं लेकर चुपचाप वाले मार्ग चुन रहे हैं।
कमीशन खोरों पर कब होगी कार्रवाई?
रिश्वतखोरों पर तो कुछ कार्रवाई होती दिख रही है लेकिन जो लोग बड़े दड़े गमी के साथ कमिशन ले रहे हैंं। उनको कब और कैंसे पकड़ा जाएगा? इसमें मुख्य रूप से नगरीय निकायों , पंचायतों, सहित अन्य अनेक विभागों के लेखा से संबंधित या उसके इर्द गिर्द वाले कार्यों के लिए जो सौदागर के रूप में कुछ एजेंट तथा कुछ दलाल किस्म कर्मचारी और उनसे मिलने जुलने वालेे लोगों पर भी प्लानिंग के साथ कार्रवाई होने की आवश्यकता है। हालाकि अनेक लोगों ने इसे सिस्टम जैसा मान लिया है। तथा कार्य कराने के लिए स्वयं ही चुपचाप दाम दे दिए जाते हैं जिससे कमीशन खोरों के होंसले बुलंद होते हैं। वे भी इतने ईमानदार बनते हैं जैसे कभी कमिशन लिया ही नहीं हो।







