गुरूकुल में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, स्व. विचित्र कुमार सिन्हाजी, स्व. गौरीशंकर कौशलजी भी रूके थे
वैदिक शिक्षा का केंद्र ही नहीं स्वतंत्रता आंदोलन में अहम भूमिका निभाई है प्राचीन गुरूकुल ने
बलराम शर्मा।
नर्मदापुरम। देश में स्थित प्राचीन गुरुकुल सक्रिय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के गतिविधियों के संचालन के प्रमुख केन्द्र रहे हैं। यह बात स्वयं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आजादी के बाद बताते रहे हैं। देश की आजादी की लड़ाई में गुरुकुल की काफी अग्रणी भूमिका रही है। अपने दिल में आजादी का जुनून पालने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के लिए मां नर्मदा के तट पर स्थित प्राचीन गुरूकुल भी स्वतंत्रता संग्राम का एक विशेष केंद्र रहा है। बताया जाता है कि यहां पर शहीद चंद्रशेखर आजाद तथा अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल ने भी रूककर आजादी के आंदोलन की रूपरेखा बनाई हैं। इसी क्रम में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, पत्रकार साहित्यकार, चित्रकार स्व. श्री विचित्र कुमार सिन्हाजी एवं उनके साथी पूर्व विधायक स्व. गौरीशंकर कौशलजी भी गुरूकुल में रूके थे। स्वतंत्रता सेनानी इस स्थान पर अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन के लिए गुप्त बैठकें किया करते थे।
गुरूकुल अध्यक्ष स्वामी ऋतस्पति परिब्राजक ने बताया था कि उन्हें अवगत कराया गया है कि इस गुरूकुल में अनेक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आंदोलन के दौरान रात में रूकते रहे हैं। तथा आंदोलन के लिए गुप्त बैठकें किया करते थे।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दैनिक क्षितिज किरण के संस्थापक स्व. सिन्हाजी के सुपुत्र दैनिक क्षितिज किरण के संपादक श्री केके सक्सेना ने बताया कि उनके पिताश्री स्व. सिन्हा जी के साथ उनके मित्र स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गौरीशंकर कौशलजी भी प्राचीन गुरूकुल में आजादी के आंदोलन के दौरान गुरूकुल में रहे हैं। अनेक बार गुरूकुल में आते जाते रहे हैं। यह जानकारी स्वयं श्री सिन्हाजी एवं श्री कौशजी से उन्हें प्राप्त हुई थी।






