जिला प्रशासन व खुफिया एजेंसियों का बढ़ा सिर दर्द
कोलकाता (आरएनएस)। भले ही देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में में एसआईआर का काम चल रहा है लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर बंगाल में देखने को मिल रहा है। निर्वाचन आयोग के अनुसार पश्चिम बंगाल में 93.22त्न मतदाताओं के घरों तक गणना फॉर्म पहुंचाए जा चुके हैं। इसी राज्य में कथित तौर पर एसआईआर से कई लोगों की मौत की खबरें मीडिया की खुराक बन रही है तो आरोप प्रत्यारोप भी जारी है। ऐसे में महानगर कोलकाता से लेकर बंगाल के ग्रामीण अंचल की बस्तियों को छोडक़र तमाम लोग गायब भी हैं। पश्चिम बंगाल सीमा पर बांग्लादेशी नागरिकों का भारी जमावड़ा लग गया है। उत्तर 24 परगना के स्वरूपनगर थाना क्षेत्र के हकीमपुर चेकपोस्ट पर सैकड़ों लोग बांग्लादेश लौटने की कोशिश करते देखे गए। बताया जा रहा है कि लोगों में अफवाह फैल गई है कि अवैध रूप से रह रहे लोग राज्य-स्तरीय पहचान पंजी (एसआईआर) शुरू हो गया है और इसी से डर कर ये लोग अपने वतन लौट रहे हैं। भीड़ में शामिल सैकड़ों व्यक्तियों को अस्थायी शरण के नीचे बड़े सामान के बैग के साथ इंतजार करते देखा गया। उक्त लोगों में कोई भी मीडिया से बात नहीं करना चाह रहें थे। लेकिन नाम की गोपनीयता पर बताया कि वे लोग भारत के विभिन्न राज्यों में खासकर बंगाल में श्रमिक के रूप में काम कर रहे थे।अधिकांश लोग निर्माण श्रमिक और भ_े में काम करने वाले हैं लेकिन अब एसआईआर के कारण पकड़े जाने जेल में डाले जाने के डर से भाग रहे हैं । समझ में नहीं आ रहा है कि वह लोग क्या करे। यहां पर भीड़ की शक्ल में रोके गए लोगों में कईयों ने बताया कि, हमलोग हम कोलकाता सहित पोर्ट इलाके के में रह रहे थे। हमने रोजमर्रा की गतिविधियों के लिए भारत के दस्तावेज हासिल कर लिए थे, लेकिन अब मैं अपने परिवार के साथ अपने असल देश बांग्लादेश जा रहे हैं लेकिन हमें रोक दिया गया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि 300 ज्यादा बांग्लादेशी नागरिक सीमा पर जमा हो गए है और बीएसएफ ने इन्हें रोका है।
कई ने स्वीकार किया कि वे वर्षों पहले अवैध तरीके से भारत में घुसे थे और यहां के झुग्गियों और कस्बों में अपने परिवारों के साथ रह रहे थे। बहरहाल घुसपैठियों के इस अचानक और बड़े पैमाने पर हुए जमावड़े ने प्रशासन के सामने एक जटिल दुविधा पैदा कर दी है। स्थानीय जिला प्रशासन व खुफिया एजेंसियों के द्वारा इनपर लगातार नजर रखी जा रही है।








