सुरक्षित वनक्षेत्रों से एक किलोमीटर के दायरे में कोई भी खनन गतिविधि नहीं होगी : सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली,(ए)। सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक निर्देंश किए कि सुरक्षित वनक्षेत्रों (राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों) के भीतर और इसतरह की किसी राष्ट्रीय उद्यान या अभयारण्य की सीमा से एक किलोमीटर के दायरे में कोई भी खनन गतिविधि नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हालांकि गोवा फाउंडेशन मामले में गोवा राज्य के संदर्भ में ऐसी पाबंदी पहले ही लगी थी, लेकिन अब इस प्रतिबंध को पूरे भारत में लागू करने की जरूरत है।शीर्ष अदालत का मानना है कि संरक्षित क्षेत्रों से एक किलोमीटर की दूरी के भीतर खनन गतिविधियां वन्यजीवों के लिए हानिकारक होंगी। हालांकि गोवा फाउंडेशन केस में ये दिशा-निर्देश केवल गोवा राज्य तक सीमित थे लेकिन इस अब पूरे देश में लागू करना चाहिए। हम आदेश देते हैं कि राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के भीतर और इसतरह के किसी राष्ट्रीय उद्यान या अभयारण्य की सीमा से एक किलोमीटर के दायरे में खनन की अनुमति नहीं होगी।
चीफ जस्टिस बीआर गवई की अगुवाई वाली बेंच ने निर्देश तब जारी किया जब झारखंड के सरंडा क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने से जुड़ी याचिकाओं पर विचार कर रही थी। शीर्ष अदालत ने सरंडा क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि क्षेत्र में जनजातीय समुदायों और वनवासियों के अधिकारों की रक्षा वनाधिकार अधिनियम के तहत की जाए।

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