बिहार में 25 साल बाद बंपर वोटिंग, पहले चरण में 60.18 फीसदी मतदान, टॉप पर बेगूसराय

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नई दिल्ली(ए)। बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में गुरुवार को अनुमानित 60.18 प्रतिशत मतदान हुआ। मतदान का आधिकारिक समय शाम 5 बजे समाप्त हो गया। हालांकि, जो मतदाता निर्धारित समय से पहले कतार में लग गए थे, उन्हें वोट डालने की अनुमति दी जाएगी। गुरुवार सुबह से ही बड़ी संख्या में महिला मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए प्रतीक्षा करती देखी गईं। हाल के दिनों में बिहार ने पुरुषों की तुलना में महिलाओं के मतदान में अधिक भागीदारी दर्ज करने का गौरव प्राप्त किया है।सर्वाधिक मतदान प्रतिशत दर्ज करने वाले जिलों में बेगूसराय (67.32 प्रतिशत), समस्तीपुर (66.65), मधेपुरा (65.74) और मुजफ्फरपुर (65.23 प्रतिशत) शामिल हैं। इस बीच, शेखपुरा में कम मतदान हुआ, जहां 52.36 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि भोजपुर में 53.24 प्रतिशत मतदान हुआ। वहीं, राजधानी पटना में 55.02 प्रतिशत मतदान होने का अनुमान है। अंतिम आंकड़े आने के बाद यह संख्या बढऩे की संभावना है।बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से 121 पर पहले चरण में मतदान हुआ था, जबकि शेष 122 पर दूसरे चरण में 11 नवंबर को मतदान होगा। चुनाव के नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। मतदान के दौरान छिटपुट हिंसा की भी खबरें आईं, जिनमें लखीसराय में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के काफिले पर हमला और छपरा में कथित तौर पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के वाहन पर हमला शामिल है। छपरा से प्राप्त खबरों के अनुसार, मांझी सीट से प्रत्याशी सत्येंद्र यादव के वाहन पर गुरुवार दोपहर हमला किया गया। इसी तरह, लखीसराय में भाजपा उम्मीदवार विजय कुमार सिन्हा के काफिले पर पत्थर और चप्पल फेंके जाने के बाद तनाव फैल गया। बताया जाता है कि भीड़ ने उन्हें घेर लिया और मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए उन्हें आगे बढऩे से रोक दिया।चुनाव आयोग ने इस घटना का कड़ा संज्ञान लिया है और बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार से जांच कर कार्रवाई करने का आग्रह किया है। उप-मुख्यमंत्री सिन्हा 2010 से लखीसराय विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। फरवरी 2005 में भी उन्होंने इस सीट से जीत हासिल की थी, लेकिन खंडित जनादेश के कारण, जिसमें किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला था, उसी वर्ष अक्टूबर-नवंबर में बिहार में फिर से चुनाव हुए, जिसमें वे राजद उम्मीदवार से हार गए। बिहार में, मुकाबला मुख्य रूप से जनता दल-यूनाइटेड के नेता और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और राजद के तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले विपक्षी महागठबंधन के बीच है। इस बार प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी (जेएसपी) की मौजूदगी कई सीटों पर व्यवधान पैदा कर सकती है और चुनाव नतीजों को प्रभावित कर सकती है। इन सब के बीच, राजद ने प्रशासन पर मतदान धीमा करने के इरादे से महागठबंधन के मजबूत बूथों पर जानबूझकर बिजली कटौती करने का आरोप लगाया।

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