कोलकाता (आरएनएस)। खरदा के पास पानिहाटी के महाज्योति नगर निवासी प्रदीप कर ने सोमवार रात अपने आवास में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। आज सुबह परिवार के सदस्यों ने उनका शव बरामद किया। पास से एक डायरी भी मिली, जिसमें लिखा था कि एनआरसी मेरी मौत के लिए जिम्मेदार है। सूचना के बाद मौके पर पहुंची खड़दह थाने की पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। बाद में राज्य की मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने मृतक के परिवार से मुलाकात की। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उक्त घटना को लेकर अपना गुस्सा जताया है। उन्होंने अपने फेसबुक पर भी लिखा है कि, 4 महाज्योति नगर, पानीहाटी, खरदा (वार्ड क्रमांक 9) के 57 वर्षीय प्रदीप कर ने आत्महत्या कर ली है, और अपने पीछे एक नोट छोड़ गए हैं जिसमें लिखा है, एनआरसी मेरी मौत के लिए जि़म्मेदार है। सीएन ने लिखा कि, भाजपा की दहशत और विभाजन की राजनीति का इससे बड़ा आरोप और क्या हो सकता है? यह सोचकर मैं अंदर तक हिल जाती हूं कि कैसे भाजपा वर्षों से एनआरसी के डर से, झूठ फैलाकर, दहशत फैलाकर और वोटों के लिए असुरक्षा का हथियार बनाकर निर्दोष नागरिकों को प्रताडि़त करती रही है। उन्होंने संवैधानिक लोकतंत्र को एक कठोर क़ानून-व्यवस्था में बदल दिया है, जहां लोगों को अपने अस्तित्व के अधिकार पर ही संदेह करने पर मजबूर किया जाता है। यह दुखद मौत भाजपा के ज़हरीले प्रचार का सीधा परिणाम है। दिल्ली में बैठकर राष्ट्रवाद का उपदेश देने वालों ने आम भारतीयों को इतनी निराशा में धकेल दिया है कि वे अपनी ही धरती पर मर रहे हैं, इस डर से कि उन्हें ‘विदेशी’ घोषित कर दिया जाएगा। मैं केंद्र सरकार से मांग करती हूं कि वह इस बेरहम खेल को हमेशा के लिए बंद करे। बंगाल कभी भी एनआरसी की अनुमति नहीं देगा, और न ही किसी को हमारे लोगों की गरिमा या अपनत्व को छीनने देगा। हमारी धरती मां, माटी और मानुष की है, नफऱत पर पलने वालों की नहीं। दिल्ली के ज़मींदारों को यह ज़ोर से और साफ़ सुन लेना चाहिए: बंगाल प्रतिरोध करेगा, बंगाल रक्षा करेगा और बंगाल जीतेगा।








