सोशल मीडिया प्रतिबंध पर प्रदर्शन

Join Us

नेपाल की राजधानी काठमांडू में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध और राजनीतिक भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले कुछ लोगों की मौत होने के बाद स्थिति काबू से बाहर हो गई है। पुलिस के साथ हुई झड़पों में खुद को जेन-जी यानी युवा पीढ़ी बता रहे 22 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई है। काठमांडू के अलावा पूर्वी शहर इटहरी में दो लोग मारे गए। जगह-जगह कर्फ्यू लगा है, सेना सडक़ों पर है। भारी झड़प व मौतों के बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने को राजी नहीं है। गृहमंत्री रमेश लेखक के बाद अब प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने भी घटना के बाद इस्तीफा दे दिया है। सरकार की तरफ से मिले संकेतों के अनुसार जल्द ही सोशल मीडिया से बैन हटाया जा सकता है। सरकार के रवैये और भ्रष्टाचार के कथित आरोपों को लेकर युवाओं में जबरदस्त आक्रोश है। उग्र होते प्रदर्शन को देखते हुए संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री आवास, शीतल निवास पर कर्फ्यू लगा है। अभी कुछ ही महीनों पहले नेपाल में राजशाही बहाल करने को लेकर आंदोलन हो चुका है। तब भी नाराज युवाओं द्वारा सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे। सरकार ने पिछले सप्ताह ही फेसबुक, इंस्टाग्राम, वाट्सएप जैसे छब्बीस सोशल मीडिया व मैसेजिंग प्लेटफार्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया। सरकार का आरोप है, ये सोशल मीडिया कंपनियां कानूनों का पालन करने में कोताही कर रही हैं।चीन की सोशल मडिया कंपनी टिकटाक द्वारा सभी नियमों का पालन किया है इसलिए उस पर प्रतिबंध नहीं लगा है। टिकटाक पर चल रहे नेपोबेबी ट्रेंड हो रहा है, जिसमें नेताओं के बच्चों के ऐशो-आराम भरे जीवन की तस्वीरें व वीडियो वायरल किए जा रहे हैं।यह सच है कि बिला-वजह सोशल मीडिया को प्रतिबंधित करने से युवाओं में आक्रोश बढऩा स्वाभाविक है। नेपाल में भ्रष्टाचार, रितखोरी व भाई-भतीजावाद को लेकर जनता में नाराजगी बढ़ती जा रही है। भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई न होने को पर भी नेपालियों में भारी निराशा है। वे देश की बदहाली के लिए राजनेताओं को दोषी मानते हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मीडिया वास्तविकता छिपाने में सरकार का पक्षकार बन गया है। वे इसे स्वतंत्रता पर हमला मान रहे हैं।जनता की ताकत को नजरंदाज करने वालों को यह समझना होगा कि नई पीढी निरंकुशता मौन होकर नहीं बर्दाश्त कर सकती। उसे अपने अधिकारों और ताकत का अंदाजा है। नेताओं को राजशाही वाले अंदाज त्यागने होंगे।

Previous articleदिव्यांगता की त्वरित पहचान हेतु जिले में स्क्रीनिंग शिविरों का आयोजन 15 सितंबर से 18 नवंबर 2025 तक
Next articleबिहार एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी