बीजिंग न तो युद्ध की साजिशें रचता है और न इसमें शामिल होता है… ट्रंप के नाटो को लिखे लेटर का चीन ने दिया जवाब

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बीजिंग । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नाटो देशों से चीन पर 50 से 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने और रूस से तेल खरीद बंद करने की अपील के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। चीन ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और स्लोवेनिया की यात्रा के दौरान वाशिंगटन को स्पष्ट संदेश दिया है।
ट्रंप ने शनिवार को नाटो सदस्य देशों को एक चि_ी लिखी, जिसे उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर भी साझा किया। इस चि_ी में उन्होंने आग्रह किया कि सभी सदस्य देश चीन पर भारी टैरिफ लगाएं और रूस से तेल की खरीद पूरी तरह रोक दें, ताकि यूक्रेन युद्ध समाप्त हो और रूस की आर्थिक स्थिति कमजोर हो।
ट्रंप ने लिखा कि मैं रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने को तैयार हूं, लेकिन तभी जब सभी नाटो देश इस पर सहमत हों और खुद भी ऐसा करना शुरू करें। चीन पर 50 से 100 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाया जाना चाहिए, जिसे रूस-यूक्रेन युद्ध के समाप्त होने पर हटाया जा सकता है। उन्होंने इसे जानलेवा लेकिन मूर्खतापूर्ण युद्ध बताया और कहा कि यह कदम युद्ध को खत्म करने में मददगार होगा।
ट्रंप ने दावा किया कि तुर्की रूस से तेल खरीदने वाले देशों में चीन और भारत के बाद तीसरे स्थान पर है, जबकि अन्य नाटो सदस्य देश जैसे हंगरी और स्लोवाकिया भी रूसी तेल की खरीद में शामिल हैं। उन्होंने पहले भी रूस पर कड़े प्रतिबंध और चीन-भारत पर द्वितीयक प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी थी।
इस बयान पर चीन की प्रतिक्रिया स्लोवेनिया से आई, जहां चीन के विदेश मंत्री वांग यी राजकीय दौरे पर थे। वांग यी ने वाशिंगटन को चेताते हुए कहा कि बीजिंग न तो युद्ध की साजिशें रचता है और न ही उनमें भाग लेता है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध किसी समस्या का हल नहीं होता और आर्थिक प्रतिबंध केवल परिस्थितियों को और जटिल बनाते हैं।
वांग ने कहा कि चीन ने 30 वर्षों से अपनी विदेश नीति में स्थिरता और निरंतरता बनाए रखी है और वह छोटे-बड़े सभी देशों को समान दृष्टिकोण से देखता है। उन्होंने स्लोवेनिया को चीन का पुराना मित्र बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध मित्रता, सहयोग और पारस्परिक सम्मान पर आधारित हैं।
वांग यी ने वर्तमान वैश्विक परिदृश्य को अराजक बताया और कहा कि चीन और यूरोप को प्रतिद्वंदी नहीं बल्कि मित्र होना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को टकराव की बजाय सहयोग का रास्ता चुनना चाहिए। ऐसा करना दोनों की ऐतिहासिक और जनतांत्रिक जिम्मेदारी है।

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