बाढ़ से हरियाणा बेहाल, जल निकासी की व्यवस्था करे सरकार : भूपेंद्र सिंह हुड्डा

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चंडीगढ़ (आरएनएस)। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि पंजाब के बाद लगभग पूरा हरियाणा भी अब बाढ़ और जलभराव की चपेट में आ चुका है। गांव, खेत, गलियां, सडक़ें, हाइवे और शहर सब जलमग्न हो गए हैं। तमाम प्रभावित लोग सरकारी मदद के लिए गुहार लगा रहे हैं। सरकार को तुरंत विशेष गिरदावरी की प्रक्रिया शुरू करके, फसलों को हुए नुकसान का 100 प्रतिशत मुआवजा देना चाहिए। साथ ही मकानों व दुकानों को हुए नुकसान का मुआयना करके जल्द मुआवजे का ऐलान करना चाहिए। प्रदेश और केंद्र सरकार को सक्रिय होकर बाढ़ प्रभावित स्थानों पर राहत कार्य शुरू करना चाहिए। अबतक जो कार्य किए जा रहे हैं, वो नाकाफी हैं, जिसके चलते जलभराव लगातार बढ़ता जा रहा है।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि मुश्किल की इस घड़ी में कांग्रेस के तमाम नेता, कार्यकर्ता, विधायक और सांसद भी लगातार अपनी क्षमतानुसार राहत कार्यों में लगे हुए हैं। ऐसे में अधिकारियों को चाहिए कि जो भी जमीनी जानकारी कांग्रेसजन प्रशासन तक पहुंचाए, उसका तुरंत संज्ञान लेते हुए मुस्तैदी के साथ समाधान किया जाए।
हुड्डा ने तमाम सक्षम लोगों से भी आगे आकर हाथ बंटाने की अपील की है। तमाम लोग आर्थिक या राहत सामग्री के तौर पर, जिस भी तरह की मदद बाढ़ पीडि़त लोगों को पहुंच सकें, जल्द से जल्द पहुंचानी चाहिए। मुश्किल की इस घड़ी में एक-दूसरे का साथ देना ही इंसानियत और भाईचारा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले दिनों में और बारिश होने की संभवना है, जो चिंता बढ़ाने वाली है। इससे निपटने के लिए सरकार को बाढ़ प्रभावित इलाकों में जल निकासी के लिए वाटर पंप, मोटर और जनरेटर की व्यवस्था कर देनी चाहिए। साथ ही लोगों के लिए खाने व पीने के पानी की सप्लाई सुनिश्चित करे और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने की व्यवस्था की जाए।
हुड्डा ने कहा कि इस जल प्रलय से सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को हुआ है। उनकी फसलें, मकान और मवेशी तक डूब गए हैं। इंसानों के लिए खाने और मवेशियों के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में जरूरी है कि सरकार चारे व खाने का बंदोबस्त करने के साथ तुरंत किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे का ऐलान करे।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित पंजाब के लिए भी मदद की मांग करी है। उन्होंने कहा है कि इस बाढ़ ने खेती-बाड़ी, मवेशी, मकान, दुकान और व्यापार सबकुछ तबाह कर दिया है। पंजाब में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। ऐसे में प्रदेश और केंद्र की दोनों सरकारों को राहत कार्य और मुआवजे में किसी तरह की कोर कसर नहीं छोडऩी चाहिए।

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