छात्रसंघ चुनाव पर जनहित याचिका पर सुनवाई — विश्वविद्यालयों ने चुनाव की जिम्मेदारी सरकार पर डाली, सरकार को 2 हफ्ते में जवाब दाखिल करने का आदेश 

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जबलपुर। उच्च न्यायालय में गुरुवार को छात्रसंघ चुनाव को लेकर जनहित याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। यह सुनवाई माननीय मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा एवं माननीय न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ के समक्ष हुई। याचिकाकर्ता अदनान अंसारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रकाश उपाध्याय, अधिवक्ता अक्षर दीप एवं रविंद्रनाथ चतुर्वेदी ने पैरवी की सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालयों की ओर से अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि छात्रसंघ चुनाव कराने का कार्यक्रम और निर्देश पूरी तरह राज्य सरकार से आते हैं तथा विश्वविद्यालय अपने स्तर पर कोई निर्णय नहीं ले सकते। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछले सात–आठ वर्षों से चुनाव नहीं हुए हैं और न ही छात्रसंघ का कोई ढांचा वर्तमान में मौजूद है। राज्य सरकार की ओर से उपस्थित शासकीय अधिवक्ता डॉ. एस.एस. चौहान ने जवाब दाख़िल करने के लिए समय माँगा। खंडपीठ ने राज्य सरकार को दो सप्ताह का में जवाब दाख़िल करने का समय दिया और मामले को 06 अक्टूबर 2025 से शुरू होने वाले सप्ताह में पुनः सुनवाई हेतु सूचीबद्ध किया। एनएसयूआई के प्रदेश सचिव एवं याचिकाकर्ता अदनान अंसारी ने कहा कि आज की सुनवाई में यह स्पष्ट हो गया कि चुनाव न कराने की जिम्मेदारी पूरी तरह राज्य सरकार की है। सरकार अपने अकादमिक कैलेंडर और आदेशों में बार-बार लिखती रही है कि सितंबर तक चुनाव होने चाहिए, लेकिन 2017 से अब तक एक भी चुनाव नहीं हुआ। छात्रों से शुल्क लिया जाता है, मगर उन्हें प्रतिनिधित्व और अधिकार नहीं दिया जाता। यह छात्रों के साथ अन्याय है और लोकतंत्र का भी अपमान है।

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