एसआईआर मसौदे पर राजनीतिक दल द्वारा एक भी दावा या आपत्ति प्रस्तुत नहीं

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-मतदाताओं से सीधे 5,015 दावे और आपत्तियाँ मिली
-भारत निर्वाचन आयोग ने दिया बयान
नई दिल्ली,(ए)। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने कहा कि बिहार मतदाता सूची के मसौदे के संबंध में किसी भी राजनीतिक दल द्वारा एक भी दावा या आपत्ति प्रस्तुत नहीं की गई है। चुनाव आयोग ने दो टूक कहा कि बिहार की अंतिम मतदाता सूची में किसी भी पात्र मतदाता को न छोड़ा जाएगा और न ही किसी अपात्र मतदाता को शामिल किया जाएगा। चुनाव आयोग ने 1 अगस्त को प्रकाशित बिहार की मतदाता सूची के मसौदे में किसी भी त्रुटि को सुधारने के लिए दावे और आपत्तियाँ प्रस्तुत करने की अपील की है।हालांकि, बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर चुनाव आयोग ने कहा कि उन्हें आज तक मसौदा सूची के संबंध में मतदाताओं से सीधे 5,015 दावे और आपत्तियाँ मिली हैं। 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के नए मतदाताओं से मिले फॉर्म 27,517 हैं। नियमों के अनुसार, दावों और आपत्तियों का निपटारा संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी/ सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ/एईआरओ) द्वारा 7 दिनों की समाप्ति के बाद किया जाना है।
एसआईआर के आदेश के अनुसार, 1 अगस्त को प्रकाशित मसौदा सूची से किसी भी नाम को ईआरओ/एईआरओ द्वारा जांच करने और निष्पक्ष और उचित मौका दिए जाने के बाद स्पष्ट आदेश पारित किए बिना नहीं हटाया जा सकता है। बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। विपक्षी दल इंडिया ब्लॉक ने आरोप लगाया है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। वे इस साल के मानसून सत्र की शुरुआत से ही बिहार एसआईआर पर चर्चा की मांग को लेकर संसद में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) की नई अर्जी पर 9 अगस्त तक जवाब दाखिल करने को कहा, जिसमें एसआईआर अभियान के बाद बिहार की मसौदा मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए 65 लाख मतदाताओं के आंकड़ों का खुलासा करने की मांग की गई है।

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