नई दिल्ली (ए.)। भारत में आतंकवाद के पतन के कगार पर होने की बात दोहराते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में अपने संबोधन में कहा कि हिंदू कभी आतंकवादी नहीं हो सकते। पहलगाम नरसंहार और ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान कांग्रेस पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा कि कांग्रेस ने कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान को दे दिया, लेकिन नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार इसे वापस लेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी की उदार नीतियों और तुष्टिकरण के रवैये ने देश में आतंकवाद को पनपने और फलने-फूलने का मौका दिया। सौभाग्य से, अब हमारे पास ऐसा नेतृत्व है जो केवल दस्तावेज़ों पर निर्भर रहने के बजाय निर्णायक कार्रवाई करता है, ब्रह्मोस मिसाइल तैनात करता है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम के इस आकलन की आलोचना करते हुए कि 22 अप्रैल को बैसरन घाटी में पर्यटकों पर हमला करने वाले आतंकवादियों से पाकिस्तान का कोई ठोस संबंध नहीं है, गृह मंत्री ने कहा, चिदंबरम साहब ने कल कहा था कि यह नहीं कहा जा सकता कि ऑपरेशन सिंदूर निर्णायक था। चिदंबरम साहब यहाँ नहीं हैं, लेकिन मैं उन्हें जवाब देना चाहता हूँ। मैं उनसे पूछना चाहता हूँ कि क्या 1965 और 1971 के युद्ध निर्णायक थे। अगर वे निर्णायक थे, तो आतंकवाद क्यों फैलता रहा? गृह मंत्री ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के 2008 के उस बयान का भी ज़िक्र किया जिसमें उन्होंने 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों में आरएसएस के शामिल होने की संभावना जताई थी। शाह ने पूछा कि हमारी एजेंसियों को इस बात के सबूत मिले हैं कि आतंकवादी पाकिस्तान से थे। लेकिन उनके (चिदंबरम के) गृह मंत्री रहते हुए अफज़़ल गुरु को फांसी नहीं दी गई… मुंबई आतंकी हमले के बाद दिग्विजय सिंह ने कहा था कि आरएसएस ने इसे अंजाम दिया है। वे किसे बचाने की कोशिश कर रहे हैं? वे क्या कहना चाह रहे हैं?








