मृतक के भाई ने ठुकराई 8.5 करोड़ की ब्लड मनी, कहा- ‘माफी नहीं, फांसी चाहिए’
सना (ए.)। यमन की राजधानी सना में हत्या के मामले में मौत की सजा का सामना कर रही केरल की नर्स निमिषा प्रिया की रिहाई की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। मृतक तलाल अब्दो महदी के परिवार ने साढ़े आठ करोड़ रुपये की ब्लड मनी (खून का बदला खून या मुआवजा राशि) की पेशकश को ठुकराते हुए निमिषा को माफ करने से साफ इनकार कर दिया है। मृतक के भाई ने कहा है कि परिवार बदले में मौत (किसास) चाहता है और निमिषा को फांसी दी जानी चाहिए। हालांकि, निमिषा की फांसी, जो पहले 16 जुलाई को होनी थी, भारत सरकार के प्रयासों के बाद फिलहाल टाल दी गई है। परिवार और सरकार की ओर से निमिषा की जान बचाने की कोशिशें अब भी जारी हैं।
मृतक का परिवार बोला- न्याय होकर रहेगा
मृतक तलाल के भाई अब्दुल फतह महदी ने बीबीसी अरबी को दिए एक बयान में स्पष्ट किया कि परिवार ‘किसास’ की मांग कर रहा है। ‘किसास’ एक इस्लामी कानूनी शब्द है, जो प्रतिशोधात्मक न्याय या बदले की कार्रवाई के सिद्धांत को बताता है। अब्दुल ने कहा न्याय तो होकर रहेगा, भले ही इसमें देरी क्यों न हो। परिवार निमिषा प्रिया की जान बख्शने के बदले में न तो माफ करेगा और न ही ब्लड मनी स्वीकार करेगा। उसे फांसी दी जानी चाहिए।
भारत सरकार की कोशिशें जारी, सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारी
इससे पहले, केंद्र सरकार ने शुक्रवार (18 जुलाई) को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह निमिषा की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। सरकार ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ को सूचित किया कि 16 जुलाई को होने वाली फांसी पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। वहीं, याचिकाकर्ता संगठन ‘सेव निमिषा प्रिया- इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल’ ने केंद्र से एक प्रतिनिधिमंडल यमन भेजने का अनुरोध किया है ताकि पीड़ित परिवार से सीधे बातचीत की जा सके, जिस पर पीठ ने याचिकाकर्ता को सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखने को कहा है। इस बीच, पिछले पांच सालों से निमिषा को बचाने की कोशिशों में जुटे सामाजिक कार्यकर्ता सैमुअल जेरोम ने कहा, यमन सरकार का रुख पूरी तरह से दयालु रहा है, लेकिन हमें तलाल के परिवार की पीड़ा को समझना होगा। उनका विश्वास जीतने और निमिषा को माफी दिलाने के लिए भारत और यमन सरकार के साथ बातचीत जारी रखनी होगी।








