विमान के दोनों इंजनों की ईंधन सप्लाई का कटऑफ होना हादसे की वजह?

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 -दुर्घटना से पहले दोनों पायलटों के बीच हुई बातचीत के अंश आए सामने
नई दिल्ली,(ए)। एअर इंडिया विमान (एआई171) हादसे की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। भारतीय विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की इस रिपोर्ट से कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इसके अनुसार टेकऑफ के कुछ सेकंड बाद ही विमान के दोनों इंजनों का अचानक बंद हो जाना, विमान क्रैश का कारण माना जा रहा है। विमान क्रैश के दौरान दोनों पायलटों के बीच बातचीत के अंश भी सामने आए हैं, जिसमें एक पायलट पूछता है, कि आपने फ्यूल क्यों बंद कर दिया? इसके जवाब में दूसरा पायलट कहता है, मैंने ऐसा नहीं किया। इसके चंद बाद ही विमान मेडिकल कॉलेज की बिल्डिंग से टकरा जाता है। इस प्रकार भारत के विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने इस हादसे की जारी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कई अहम और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इनमें विमान के दोनों इंजनों की ईंधन सप्लाई का कटऑफ होना सबसे अहम खुलासा माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, विमान के टेकऑफ करने के कुछ ही सेकंड बाद दोनों इंजनों के फ्यूल कटऑफ स्विच रन से कटऑफ स्थिति में चले गए। इसका मतलब है कि इंजनों तक ईंधन की सप्लाई अचानक बंद हो गई, जिसके कारण दोनों इंजन पूरी तरह से बंद हो गए। यह विमान के लिए बेहद खतरनाक स्थिति थी, क्योंकि टेकऑफ के तुरंत बाद इंजन पावर के बिना विमान उड़ान नहीं भर सकता और न ही ऊंचाई हासिल कर सकता। फ्यूल कटऑफ स्विच का बंद होना एक असामान्य और गंभीर घटना है, क्योंकि ये स्विच कॉकपिट में विशेष रूप से डिजाइन किए गए हैं ताकि गलती से इन्हें छुआ न जाए। जांच में अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि यह मानवीय गलती थी, तकनीकी खराबी थी, या कोई अन्य कारण। हालांकि, 2018 में अमेरिका के फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) ने एक सलाह जारी की थी, जिसमें फ्यूल कटऑफ स्विच के लॉकिंग मैकेनिज्म के संभावित ढीले होने की चेतावनी दी गई थी, लेकिन यह सलाह वैकल्पिक थी, और एयर इंडिया ने इसकी जांच नहीं की थी। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि यह केवल शुरुआती निष्कर्ष हैं, और जांच अभी पूरी नहीं हुई है। जांच में अमेरिका के एनटीएसबी, बोइंग, जीई, और यूके, पुर्तगाल, कनाडा जैसे देशों के विशेषज्ञ शामिल हैं। ब्लैक बॉक्स (फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर) से डेटा निकाला जा चुका है, लेकिन पीछे का ईएएफआर क्षतिग्रस्त होने के कारण उसका डेटा पूरी तरह प्राप्त नहीं हो सका। जांचकर्ता अब थ्रॉटल क्वाड्रंट, फ्यूल कटऑफ स्विच, और कॉकपिट डिजाइन की गहन जांच कर रहे हैं। साथ ही, मानवीय कारकों और संभावित जानबूझकर की गई कार्रवाइयों की भी जांच की जा रही है।
ईंधन के नमूने संतोषजनक पाए गए
रिपोर्ट में यह साफ किया गया है कि विमान के ईंधन में कोई खराबी नहीं थी। दुर्घटना के बाद जांचकर्ताओं ने विमान को ईंधन देने वाले टैंकर (रिफ्यूलिंग बाउजर) और विमान के टैंकों से लिए गए ईंधन के नमूनों का टेस्ट किया। सभी नमूने संतोषजनक पाए गए, यानी ईंधन की गुणवत्ता में कोई कमी नहीं थी, और यह हादसे का कारण नहीं था। इसके अलावा, हवाई अड्डे के सीसीटीवी फुटेज से यह भी पुष्टि हुई कि उड़ान मार्ग पर कोई पक्षी गतिविधि (बर्ड स्ट्राइक) नहीं थी, जो इंजन बंद होने का एक अन्य संभावित कारण हो सकता था। यह निष्कर्ष इस बात की ओर इशारा करता है कि हादसे का कारण विमान की तकनीकी खराबी या बाहरी कारकों (जैसे पक्षी टकराने) से संबंधित नहीं था। जांच अब कॉकपिट में हुई गतिविधियों और फ्यूल कटऑफ स्विच के संचालन पर केंद्रित है।
उड़ान के लिए फिट थे पायलट्स और क्रू
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि विमान के चालक दल यानी 56 वर्षीय कप्तान और 32 वर्षीय को-पायलट दोनों ने उड़ान से पहले ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट पास किया था। यह टेस्ट भारतीय समयानुसार सुबह 11:55 पर किया गया था, और दोनों को उड़ान के लिए पूरी तरह फिट पाया गया था। इसके अलावा, 10 केबिन क्रू मेंबर्स भी ड्यूटी के लिए तैयार और प्रशिक्षित थे। बता दें कि कप्तान सुमीत सभरवाल के पास 15,000 से अधिक उड़ान घंटों का अनुभव थी जिसमें 8,596 घंटे बोइंग 787 पर बिताए। वहीं को-पायलट क्लाइव कुंदर के पास 3,400 घंटों का अनुभव, जिसमें 1,128 घंटे बोइंग 787 पर बिताया अनुभव भी शामिल है।

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