मंडी में फिर फटे बादल, 9 जिलों में फ्लैश फ्लड की चेतावनी जारी

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हिमाचल में 269 सडक़े, 285 बिजली ट्रांसफॉर्मरों और 278 पेयजल योजनाएं ठप
शिमला,(ए)। हिमाचल प्रदेश में बारिश तबाही मचा रही है। मंडी में एक बार फिर बादल फटा। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के रविवार को जारी रेड अलर्ट के बीच सुबह से राज्य के ज्यादातर हिस्सों में मूसलाधार बारिश हो रही है। मंडी, कांगड़ा और सिरमौर जिलों में बहुत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है, जबकि शिमला, सोलन और हमीरपुर समेत 9 जिलों में अगले 24 घंटे के लिए फ्लैश फ्लड की चेतावनी जारी की गई है।इस बीच मंडी जिला में फिर बादल फटने से दहशत फैला गई। पधर उपमंडल की टिक्कन पंचायत के सिलबधानी गांव में बीती देर रात बादल फटा, जिससे स्थानीय नाले में बाढ़ आ गई और दो पुलियां बह गईं। इस घटना में कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। प्रशासन की टीम क्षति का आकलन कर रही है। मौसम विभाग के मुताबिक पिछले 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश कांगड़ा जिला के नगरोटा सुरियां में 102 मिमी दर्ज की गई। इसके अलावा ऊना में 62 मिमी, धर्मशाला में 61 मिमी, कटुआला और घमरूर में 40-40 मिमी, बरठीं में 38, सुजानपुर टीहरा में 36, भराडी में 35, नादौन में 30 और मंडी में 21 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
मौसम विभाग ने रविवार के लिए कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है, जबकि सोमवार को बहुत भारी बारिश का ओरेंज अलर्ट जारी किया है। 8 से 10 जुलाई तक येलो अलर्ट और 11 व 12 जुलाई को सामान्य बारिश की संभावना जताई है। लगातार बारिश से राज्य में जनजीवन अस्त-व्यस्त है। आपातकालीन परिचालन केंद्र के मुताबिक रविवार सुबह तक प्रदेश में 269 सडक़ों, 285 बिजली ट्रांसफॉर्मरों और 278 पेयजल योजनाओं पर असर पड़ा है। अकेले मंडी जिले में 200 सडक़ें, 236 ट्रांसफॉर्मर और 278 जल योजनाएं ठप पड़ी हैं। यह जिला इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक 20 जून से 5 जुलाई के बीच हिमाचल प्रदेश में बादल फटने, भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और सडक़ हादसों में अब तक 74 लोगों की मौत हो चुकी है। 115 घायल हैं, जबकि 37 लोग अभी भी लापता हैं। इस अवधि में राज्य को 566 करोड़ रुपए से ज्यादा की जनधन हानि का सामना करना पड़ा है। मंडी जिले में 30 जून की रात बादल फटने की 12 घटनाओं में 14 लोगों की जान चली गई और 31 लोग लापता हो गए। कांगड़ा जिले में 13 मौतें हुई हैं, जिनमें 7 भूस्खलन और 2 बादल फटने से हुईं।
प्राकृतिक आपदाओं के चलते 19 मकान पूरी तरह ध्वस्त, 93 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त, 213 पशुशालाएं और 21 दुकानें बर्बाद हो चुकी हैं। खेती और बागवानी को भी भारी नुकसान पहुंचा है। साथ ही 10,000 पोल्ट्री पक्षी और 253 मवेशी मारे गए हैं। फिसलनभरी सडक़ों और कमजोर पुलों के चलते सडक़ हादसों में 27 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें चम्बा में 6, मंडी, बिलासपुर और कुल्लू में 3-3 मौत हुई हैं।

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