जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ के समक्ष याचिकाकर्ता गिरजा बाई निवासी ग्राम माधवपुर तहसील चंदला जिला छतरपुर की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि तहसीलदार चंदला द्वारा गरीब हरिजन महिला को सन 2001-2002 मे भूमि का पट्टा प्रदान किया गया था। उक्त भूमि में यचिकाकर्ता को पट्टा, ऋण पुस्तिका एवं भूमि का नामकरण कर खसरा पंचसाला प्रदान किया गया था। उक्त भूमि में पूर्व से कब्ज़ा रहा और आज दिनंक तक कब्ज़ा है और उक्त भूमि में कृषि कर अपना एवं अपने परिवार का भरण पोषण करती चली आ रही है और सन 2001-2002 से सन 2011 उक्त भूमि में यचिकाकर्ता का सभी शाशकिय दस्तवेजोन एवं रिकार्ड में नाम दर्ज रहा परंतू उक्त भूमि को किसी का अधिकारी के आदेश के बिना खसरा का संधारण करती समय उक्त भूमि शासन मध्य प्रदेश शाशकिय दरज कर दी गई जब यचिकाकर्ता को पता चला कि उसकी भूमि को शासकीय मद में दर्ज कर दी गई तब रिकॉर्ड सुधार का आवेदान पत्र दिनांक 2/12/2021 को एस. डी.ओ. राजस्व लवकुश नगर को दिया गया जिसमे एस. डी.ओ. लवकुश नगर तहसीलदार चंदला जंlच प्रतिवेदन हेतु आदेश दिया गया तहसीलदार चंदला ने आवेदिका के पक्ष मे दिनांक 11/4/2022 को जांच प्रतिवेदन तैयार कर एस. डी.ओ. लवकुश नगर के समक्ष प्रस्तुत किया गया, इसके बाद भी यचिकाकर्ता का रिकॉर्ड सुधार नहीं हुआ ।
याचिकाकर्ता अनेक बार तहसीलदार चांदला अनुविभागीय अधिकारी राजस्व लवकुश नगर कलेक्टर छतरपुर एवं सचिव राजस्व विभाग मध्य प्रदेश शासन भोपाल को भी आवेदन पत्र दिया इसके बाद भी याचिका के आवेदन पत्रो पर कोई विचार नहीं किया गया और ना ही उक्त भूमि का रिकॉर्ड सुधार कर मध्य प्रदेश शासन के स्थान पर यचिकाकर्ता का नाम दर्ज किया गया, जो अवेधानिक और नियम विरुद्ध है । तब याचिकाकर्ता विवश होकर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय मे याचिका प्रस्तुत किया। उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता के आवेदन पर 90 दिन के अंदर निराकरण करने का आदेश दिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शम्भू दयाल गुप्ता एवं कपिल गुप्ता ने पैरवी की।








