जामा मस्जिद में रंगाई-पुताई का खर्च खुद उठाएगी मस्जिद समिति, सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इनकार

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संभल (ए)। सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को संभल में शाही जामा मस्जिद के बाहरी हिस्से की सफेदी कराने का निर्देश दिया गया था और कहा गया था कि मस्जिद समिति इस कार्य पर होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति करे। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित जामा मस्जिद की पुताई के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के वकील को विशेष रूप से यह बताने का निर्देश दिया कि मस्जिद की बाहरी दीवार की पुताई को लेकर क्या पूर्वाग्रह है। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने मस्जिद कमेटी की ओर से जताई गई आपत्ति पर यह निर्देश दिया था। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया था। मस्जिद कमेटी के वकील एसएफए नकवी ने कहा कि एएसआई केवल मस्जिद के भीतर की दीवार के बारे में बात कर रहा है। अदालत ने संभल के जिलाधिकारी को वर्ष 1927 में प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच हुए समझौते की मूल प्रति सुनवाई की अगली तिथि 12 मार्च 2025 को पेश करने का निर्देश दिया। इसी समझौते के तहत मस्जिद एएसआई को सौंपी गई थी। नकवी ने दलील दी, जवाबी हलफनामे में एएसआई की रिपोर्ट पर की गई आपत्तियों के पैराग्राफ छह, सात और आठ के कथन से कोई इनकार नहीं किया गया है। अदालत ने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट को लेकर दाखिल आपत्ति के पैरा छह और सात का जवाब एएसआई द्वारा अपने जवाबी हलफनामे में नहीं दिया गया है। अदालत ने आदेश दिया, “आपत्ति के पैराग्राफ सात का जवाब दाखिल किया जाए और बताया जाए कि क्या विवादित ढांचे के बाहर पुताई और अतिरिक्त लाइट व सजावटी लाइट लगाने की जरूरत है या नहीं।” इससे पहले, 28 मार्च को एएसआई की ओर से सौंपी गई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि मस्जिद के भीतर की दीवार पर सेरामिक पेंट किया गया है और वर्तमान में पुताई की कोई जरूरत नहीं है। तब अदालत ने एएसआई को मस्जिद परिसर से धूल और घास की सफाई करने करने का निर्देश दिया था।

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