आंधियों से लड़े तो हुआ यह असर, हमको तूफां का रुख मोड़ना आ गया

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46 वें स्थापना दिवस पर मंचदीप ने डॉ. अनु सपन को प्रदान किया नीरज सम्मान, यादगार बन गई गीत गजलों से सजी शाम

जबलपुर। मंचदीप ने गीत गजलों से सजी जो शाम संस्कारधानी को सौंपी, वह यादगार बन गई। शहर की अग्रणी साहित्यिक, सांस्कृतिक संस्था मंचदीप के 46 वें स्थापना दिवस पर इस वर्ष का पद्म भूषण गोपालदास ‘ नीरज’ सम्मान देश की सुविख्यात कवयित्री एवं गीतकार डॉ. अनु सपन, भोपाल को प्रदान किया गया। शुक्रवार की शाम कला वीथिका सभागार में आयोजित गरिमामय समारोह में डॉ. अनु सपन के साथ ही अभय तिवारी, श्रुति जैन श्री, सांजली अग्रवाल, अन्वी विश्वास द्वारा की गई गीत रस वर्षा से सुधि श्रोता सराबोर हो गए। संस्था अध्यक्ष मथुरा जैन उत्साही के संचालन में हुए काव्यपाठ कार्यक्रम में डॉ. अनु सपन की इस रचना पर सभागार में देर तक तालियों की गूंज सुनाई देती रही –

मुश्किलों से हमें जूझना आ गया हारते हारते जीतना आ गया
आंधियों से लड़े तो हुआ यह असर हमको तूफां का रुख मोड़ना आ गया।

उनकी इस रचना को श्रोताओं ने भरपूर सराहा –
धूप के आईने में संवर जाएगी ,
जिंदगी जब तपेगी निखर जायेगी।

श्रोताओं की वाह वाही के साथ गीत गजलों का कारवां आगे बढ़ता रहा और अनु सपन ने अगली रचना पढ़ी –
मेरे हाथों की लकीरों में समाने वाले
कैसे छीनेंगे तुझे मुझसे जमाने वाले।

श्रोताओं की फरमाइश पर उन्होंने अपनी यह रचना पढ़ी –
इस तरह से मुझे आप मत देखिए,
भाव सूची नहीं हूं मैं बाजार की,
मेरी हर सांस में एक उपन्यास है,
कोई कतरन नहीं हूं मैं अखबार की।

इससे पहले अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा के कुलगुरू प्रो. आर के कुररिया (दुबे) के मुख्य आतिथ्य, आचार्य भगवत दुबे की अध्यक्षता, सारस्वत अतिथि महामहोपाध्याय डॉ. हरिशंकर दुबे, संस्था के संरक्षक पंडित अशोक मनोध्याय की उपस्थिति में डॉ. अनु सपन को पद्म भूषण गोपाल दास नीरज सम्मान प्रदान किया गया। उन्हें सम्मान पत्र, शॉल एवं ग्यारह हजार रुपए की सम्मान निधि प्रदान की गई। समारोह का सफल संचालन कार्यक्रम संयोजक राजेंद्र सिंह ने किया। स्वागत उद्बोधन एवं आयोजन की जानकारी अशोक मनोध्याय एवं मथुरा जैन उत्साही ने दी। कुलगुरू प्रो. आर के कुररिया (दुबे) ने कहा कि बीसवीं शताब्दी के महान कवि गोपालदास नीरज जिन्हें भारत सरकार ने दो पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया, उनका स्नेह मंचदीप को प्राप्त होता रहा यह हम सभी के लिए गौरव की बात है। उन्होंने अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में रामायण पीठ की स्थापना करने की परिकल्पना के संबंध में अपने विचार रखे। आचार्य भगवत दुबे ने अपने दोहे सुनाए। शहर के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने अतिथियों एवं आमंत्रित गीतकारों का स्वागत किया। कार्यक्रम के समापन पर राजेंद्र सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में श्री रामलीला समिति गढ़ा, विजन जबलपुर सहित शहर की विभिन्न संस्थाओं का सहयोग रहा।

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