पूर्व सांसद सज्जन कुमार को बाप-बेटे को जिंदा जलाने के मामले में उम्रकैद

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 सिख दंगे 1984
नईदिल्ली,(आरएनएस)। दिल्ली की एक कोर्ट में 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के दौरान सरस्वती विहार की एक घटना के लिए कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई है।राऊज एवेन्यू कोर्ट ने सज्जन को दंगों के दौरान 2 सिखों को जिंदा जलाने वाली भीड़ का नेतृत्व करने का दोषी मानते हुए 12 फरवरी को दोषी घोषित किया था।बता दें, दंगों के दौरान सरस्वती विहार में जसवंत और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या हुई थी।
उम्रकैद के अलावा सज्जन कुमार को दंगा करने के लिए 2 साल, घातक हथियारों के साथ दंगा करने के लिए 3 साल और जुर्माना, मृत्यु या गंभीर नुकसान पहुंचाने के इरादे से गैर-इरादतन हत्या का प्रयास करने के लिए 7 साल की सजा सुनाई गई है।सिख नेता गुरलाद सिंह का कहना है कि उन्हें मौत की सजा से कुछ कम स्वीकार नहीं है, वह कोर्ट के फैसले खुश नहीं हैं, सरकार से अपील करेंगे कि वह हाई कोर्ट जाए। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कोर्ट से मौत की सजा की मांग की थी और लिखित में दलील थी कि यह मामला निर्भया कांड से भी घातक है क्योंकि उस कांड में सिर्फ एक लडक़ी को निशाना बनाया गया, जबकि इसमें पूरे समुदाय को जानबूझकर निशाना बनाया गया था।पक्ष ने कहा कि हत्याएं क्रूर और शैतानी तरीके से की गई थीं, जिसने समाज को झकझोर दिया था। दंगों के कारण सिखों का पलायन हुआ था।तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में भडक़ी सिखों के खिलाफ हिंसा में 1 नवंबर, 1984 को सरस्वती विहार इलाके में बड़ा कांड हुआ था। यहां भीड़ ने जसवंत सिंह और तरुणदीप सिंह को जिंदा जला दिया था। आरोप था कि हिंसक भीड़ का नेतृत्व सज्जन कुमार ने किया था। मामला पंजाबी बाग पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ।अभी सज्जन 1984 सिख दंगे के एक अन्य मामले में तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है।दरअसल, 1970 के दशक में खालिस्तानी नेता जरनैल सिंह भिंडरावाले ने स्वर्ण मंदिर पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 5 जून, 1984 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ऑपरेशन ब्लूस्टार के तहत सेना को स्वर्ण मंदिर में भेज भिंडरावाले और उसके समर्थकों को मार गिराया था।
इससे नाराज उनके सिख अंगरक्षकों सतवंत सिंह और बेअंत सिंह ने उनकी हत्या कर दी थी।
इसके बाद देश में सिख विरोधी दंगे भडक़ उठे थे। दिल्ली-पंजाब में दंगे का अधिक असर था।
सज्जन का जन्म ब्रिटिश भारत में हुआ था। उन्होंने 1977 में दिल्ली में पार्षद का चुनाव जीतकर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। 1980 में वे कांग्रेस के टिकट पर पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए थे।
उन्होंने 1991 और 2004 में फिर लोकसभा चुनाव जीता। 2004 में रिकॉर्ड 8.55 लाख वोटों से चुनाव जीते थे।
दिसंबर, 2018 में सिख दंगों से जुड़े एक मामले में सजा होने के बाद उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था।

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