10 सालों में सबसे गर्म फरवरी का महीना पारा 28 के पार

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नई दिल्ली (ए)। मौसम को लेकर चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें दावा किया है कि देश में ऋतुएं सिकुड़ रही हैं। इसकी वजह से जाड़े और गर्मी के दिन कम होते जा रहें है। इस साल फरवरी महीने में ही गर्मी की शुरूआत हो गई है। बीते 10 वर्षों में इस साल की जनवरी के बाद फरवरी सबसे गर्म रही। फरवरी की शुरूआत में ही अधिकतम तापमान 28 के पार चला गया। मौसम में हो रहे इस उलटफेर को लेकर चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय यानी सीएसए के मौसम विभाग ने रिसर्च किया है। इसमें दावा किया गया है कि देश में ऋतुएं सिकुड़ रही हैं। तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन की वजह से चाहे बसंत हो या हेमंत और शरद ऋतु, इनकी अवधि धीरे धीरे कम होती जा रही है। सीएसए के मौसम विभाग के वैज्ञानिकों ने बीते 10 वर्षों में जलवायु की स्थिति का अध्ययन करने के बाद अपनी रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में बताया है कि गर्मी, बरसात और जाड़े के समय और उसके प्रभाव में बड़ा परिवर्तन आया है। इस साल के मौसम का हवाला देते हुए कहा गया है कि ठंड खत्म होने से पहले ही गर्मी शुरू हो गई। फरवरी महीने में ही दिन गर्म होने लगे। अब तो सिर्फ सुबह और शाम की ही ठंड बाकी रह गई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक जलवायु में हो रहे परिवर्तन को समझाने के लिए डेटा कैप्सूल तैयार किया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी महीने में तापमान औसत से 7 डिग्री अधिक चल रहा है। जनवरी महीने में भी गर्मी पुराने रिकार्ड तोड़ कर नई ऊंचाई पर पहुंच गई। जनवरी 2025 में औसत तापमान 13।23 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इस रिपोर्ट के मुताबिक साल 2018 में 3 से 4 डिग्री की ठंड सिर्फ 7 दिन पड़ी थी। जबकि साल 2023 और 2024 में इतनी ठंड केवल 3 दिन ही रही। इसका अर्थ यह कि बीते कुछ वर्षां में कड़ाके की ठंड बस कुछ ही दिनों की रह गई है। इसी प्रकार गर्मी को लेकर जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2018 में 10 दिनों तक 42 से 44 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया था। जबकि साल 2022 में इतनी ही गर्मी केवल 22 दिन ही रही।
वहीं 2024 में 42 से 44 डिग्री सेल्सियस की गर्मी 28 दिन रहे थे। वैज्ञानिकों के मुताबिक मौसम में हुए इस बदलाव के सबसे बड़ी वजह ग्लोबल वॉर्मिंग और जलवायु के पैटर्न में बदलाव को माना गया है।

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