श्री नर्मदा जयंती 4 फ़रवरी विशेष
पंकज पटेरिया
’मां नर्मदा हमारी जीवन रेखा है बोले डॉ शर्मा पुण्य सलिला नर्मदा जी हमारी जीवन रेखा है। अन्नदा जलदा,प्राणदा नर्मदा मैया से अलग हमारा कोई अस्तित्व नहीं है। पूर्व विधान सभा अध्यक्ष, विधायक डॉ सीता सरन शर्मा बताते हैं बचपन के सफे पलटते हुए। हम स्नान करके आते थे, माताजी छोटे से गिलास में दूध देती थी और कहती थी जाओ मां को अर्पण करके आओ हम जाते थे और यह कार्य करते थे। मुझे तब और अब सदा महसूस होता है नर्मदा मैया प्रत्यक्ष है। हमारी सुख दुख की साक्षी हैं और उनका वरद हस्त हम सभी उनके बच्चों पर है। अब हमारा दायित्व हम उनकी महान कृपा ऋण से उऋण तो नहीं हो सकतेएअपितु उनके पावन दुग्ध धवल आंचल को अपने प्रयासों से कम से कम निर्मल तो रख सकते हैं। नर्मदा मैया हमारे सभी कार्य कारज की साक्षी रहती है। रेवा का जयंती महोत्सव माघ शुक्ल सप्तमी मकर के सूर्य में मध्यान में विभिन्न मंदिरों में श्रद्धा भक्ति के साथ मनाया जाता है। नर्मदा मन्दिर के मुख्य अर्चक डा गोपाल प्रसाद खद्दर और आचार्य पंडित नरेश परसाई और पंडित सोमेश परसाई बताते है कि १९७८ से सबसे पहले सिद्ध संत ब्रम्हलीन राधे महाराज सहयोगी स्व ज्ञान चंद मस्टे ने चल समा रोह शुरू किया था। मोरछली चोक से नर्मदा जी की शोभा यात्रा शुरू की गई थी। १९८२ में जन सह भागी से आयोजन का स्वरूप आकार लेता रहा।। नावो के मंच बनाकर मातारानी की पूजन अभिषेक की परम्परा शुरू हुई। सहस्त्रों प्रज्वलित दीप नर्मदा जी छोड़े जाते।
जल विग्रह में प्रवाहित ये सैकड़ों दीप एक अलौकिक आल्हादकारी परिदृश्य उपस्थित कर देते है। मुझे याद है जब भारत में दूर दर्शन नहीं आया था पश्यिम जर्मनी की टी वी टीम नर्मदा जयंती महोत्सव कवर करने नर्मदापुरम आई थी। मै अपना सौभाग्य मानता हूं जो मुझे टीम को ब्रीफ दे ने का अवसर नर्मदा मां ने दिया था। धीरे धीरे नर्मदा जयंती उत्सव विराट रूप लेता गया ओर इसमें संत महात्माओं के साथ राज नेता शामिल होने लगे। इससे विकास आदि के कामों की भी घोषणा हुईएप्रगति हुई। प्रदूषण मुक्ति घाटो की मरम्मत आदि की दिशा में कुछ महत्व पूर्ण काम हुए। बहुत से अभी होने भी है। बहरहाल मा नर्मदा की महिमा अपरंपार है। और इसके लिए हमारे जन प्रतिनिधि सतत प्रयासरत है। समीक्षक डॉक्टर रघुनंदन प्रसाद सीठा बताते हैं मां के दिव्य रूप की महिमा न्यारी है। हम उनका क्या गान करेंगे। दर्शन मात्र से सारे पाप क्षय हो जाते है।शिव के दिव्यरूप से प्रगट होने से महेश्वरी गंगा दक्षिणभाग
मै स्थित होने से दक्षिण गंगा रूप में वंदनीय है।
मत्स्य पुराण में वर्णित है।नर्मदा पितरों की पुत्री है लिहाजा पावन नर्मदा तट पर किया गया श्राद्ध अक्षय होता है। मां सिद्धेश्वरी है। मोक्ष दाई है। यहां जल राशि में मिलने बाले साधारण कंकड़ को जय शिव शंकर मानकर पूजन की जाती हैएउनकी प्राणप्रतिष्ठा विराजते ही हो जाती। इन्हीं कंकड़ों से आंध प्रदेश में नर्मदेश्वर का भव्य मंदिर बना है।उसके लिए करीब सवा लाख पत्थर नर्मदा जी से एकत्र किए गए थे। अनेक संत महात्माओं दरवेशो ने नर्मदा के चरणों में तपस्या की यहां विद्यमान समाधि याए स्मारक छतरियां इस बात के जीवंत प्रमाण है। प्रख्यात मानस विद प्रभु दयाल रामायनी
बताते है भगवान श्री राम के चारु चरणों के पावन स्पर्श से वन गमन के समय पुण्य सलिला नर्मदा क्षेत्र धन्य हुआ। वहीं यक्ष राज कुबेर लंकेश रावण ने
भी मेकल सुता तट पर तपस्या की ।
शोध से यह भी प्रमाणित होगया है नर्मदा जल में अनेक ओषधि तत्व हैएसेवन स्नान से अनेक बीमारियां ठीक होती है। दादा धूनी वाले जी के अनुयाई दादा जी भैया सरकार 4 बरसों से केवल नर्मदा जल मात्र ग्रहण कर नर्मदा जी की परिक्रमा कर रहे है। यह मां नर्मदा की शक्ति ही तो है। बाबई ब्लाक के सूर्य कुंड नामक स्थान पर नर्मदा जी में स्नान करने से विभिन्न चर्म रोग अच्छे हो जाते है। यह भी मान्यता है काल सर्प योग से भी मुक्ति मिलती है। विष्णु पुराण में एक मंत्र भी है।
मंत्र
रूॐ नर्मदाए नमःप्रात: नर्मदाए नमो निधि। नमोस्तुते नर्मदे देवी त्राहिमाम भव सागरत
नर्मदे तुभ्यमए त्राहि मा विष सर्प । कहते है इस मंत्र को अभीमंत्रित कर घर की देहरी पर बांधने सेएनरमदाजी में सूर्यो दय के समय स्नान करने से काल सर्प योग की निवृति हो जाती है। बहरहाल इस साल भी 4 फ़रवरी को नर्मदा जयंती महोत्सव धूम धाम से मनाए जाने की भव्य तैयारी चल रही है। मंदिरों घाटों पर मनोहारी सजावट की गई। नर्मदा जयंती समारोह के अध्यक्ष डॉ सीता सरन शर्मा सांसद दर्शन सिंह चौधरी अन्य नर्मदा अनुरागी लोगों के साथ प्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को श्री नर्मदा जयंती महोत्सव के लिए आमंत्रित कर आए हैं। मुख्यमंत्री जी ने सहर्ष इस गरिमा मय समारोह में आने की सहमति दी है। जाहिर है इससे सरल हृदय नर्मदापुर वासियों का उत्साह बड़ा है । वे अपने प्रिय मुख्यमंत्री के आने का पलक पांवड़े बिछा प्रतीक्षा कर रहे हैं। प्रसंग वश अपनी अपनी विनय कविता मां के चरणों मे अर्पित करते नर्मदे हर।
+मातु नर्मदे+
प्रात स्मरणीय मातु नर्मदे।
हृदय वासनी मातु नर्मदे।
शोक एदुखएसंताफ हरती
सुख वैतरणी मातु नर्मदे।
देव विप्रए आर्त जनों की
शरणस्थली मातु नर्मदे
पतित पावनी मातु नर्मदे
मोक्ष दा यनी मातु नर्मदे।
हरकंकड़ शिवशंकर है
महिमा मई मातु नर्मदे।
जीवन मैया पार लगा दो
कृपा मई मातु नर्मदे।
पद पंकज में जीवन बीते
वरदायनी मातु नर्मदे।






