उज्जैन,(आरएनएस)। महाकाल मंदिर में दर्शन के नाम पर हुए महाघोटाले में नित नए खुलासे हो रहे हैं। मामले का खुलासा होने के बाद कई ऑडियो-वीडियो भी सामने आ चुके हैं। इसके बाद भी मंदिर प्रशासक घोटाले में शामिल लोगों पर मेहरबान बने हुए हैं। हालांकि इस मामले में दस आरोपी जेल की हवा खा रहे हैं। इसके बाद भी महाघोटाले की लगातार परतें खुलती जा रही हैं। महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के 26 दिसम्बर 2024 से 25 जनवरी 2025 तक के ड्यूटी रजिस्टर के क्रमांक 32 पर निनाद काले का नाम आज भी दर्ज है। यह निनाद काले, जो महाकाल नि:शुल्क अन्नक्षेत्र का प्रभारी था और जिसे कार्ट ने सुरक्षा गार्ड दिनेश मराठा की हत्या के आरोप में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास से दंडित किया है, उसे बर्खास्त करने के बजाय मंदिर समिति ने नियमित कर्मचारियों के रूप में ड्यूटी रजिस्टर में उसका नाम अभी भी दर्ज कर रखा है। निनाद के अवैध संबंध सुरक्षा गार्ड दिनेश की पत्नी भावना से थे। इसका खुलासा होने पर निनाद और भावना ने सुपारी देकर दिनेश की हत्या कराई थी। मामले में निनाद, मृत गार्ड की पत्नी व एक अन्य सजा भुगत रहे हैं। जून 2024 में महाकाल मंदिर में सुरक्षा सुपरवाइजर पपद पर कार्यरत निजी कंपनी के कर्मचारी सूरज गेमे को मुंबई क भक्तों से भस्मारती दश्रन कराने के एवज में 14 हजार रुपए की अवैध वसूली के आरोप में मंदिर समिति ने हटा दिया था। सूत्रों के अनुसार गत दिवस उसी सूरज गोमे को पदोन्नत कर सुरक्षा अधिकारी बना दिया गया, जबकि मंदिर समिति ने मुंबई के 14 भक्तों से रुपए लेने के आरोप को सही पाया था और सहायक प्रशासक मूलचंद जूनावाल ने पुष्टि कर सूरज को ड्यूटी से हटाने की बात कही थी।
नियमित कर्मचारियों के ड्यूटी रजिस्टर में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे निनाद काले का नाम दर्ज करने की सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने मानवीय त्रुटि बताते हुए शनिवार को ही उसका नाम रजिस्टर से हटाने का भरोसा दिलाया और निजी कंपनी के कर्मचारी को प्रमोट करने की अफवाह बताया जूनवाल ने स्वीकारा कि सूरज ड्यूटी पर लौटने की जुगत लगा रहा हे, लेकिन जिसने भक्तों को श्रद्धा को लूटा, उसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।








