त्रिशूल भेद में शिव महापुराण एवं महामृत्युंजय जप यज्ञ
जबलपुर/पुण्य सलिला नर्मदा के पावन तट पर त्रिशूल भेद में आयोजित शिवमहापुराण कथा के दूसरे दिन कथा व्यास डॉ.सत्येन्द्र स्वरूप शास्त्री ने कहा कि जिसे भगवान का प्रेम प्राप्त हो वह भाग्यशाली है। जो भगवान के विषय में जानने के लिए जिज्ञासु हो, वह भाग्यवान है। हम लोग जिस कलयुग में जी रहे हैं इस युग में बड़े-बड़े महात्माओं ने गहरा चिंतन किया है जो भक्ति को धारण करता है वह कलयुग के प्रभाव से बच जाता है। भगवान शिव की भक्ति जीव को अकाल मृत्यु के भय से बचाती है।
डॉ.शास्त्री ने कहा कि जीवन में तीन ताप परेशान करें तो भगवान के निकट पहुंच जाएं जिससे हमें तीनों ताप से छुटकारा मिलता है। भगवान शिव का नाम और ध्यान भी मंगलमय है। भगवान शिव काल के ऊपर हैं वह अजर-अमर हैं। उन्होंने कहा कि जगत में परमात्मा सर्वोच्च सत्ता है। भगवान के लिए इस जगत में कुछ भी असम्भव नहीं है। भगवान इस जगत के पालनहार हैं।








