व्याघ्र (बाघ)पर सवार होकर आ रही मकर संक्रांति

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 14 को मनाई जाएगी संक्रांति, सकारात्मक प्रभाव से व्यापारी वर्ग को होगा लाभ
हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। इस दिन सूर्य धनु राशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस दिन पवित्र नदी में स्नान व उसके पश्चात दान किया जाता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे के अनुसार इस साल मकर संक्रांति मंगलवार 14 जनवरी को माघ कृष्ण चतुर्थी में पुनर्वसु व पुष्य नक्षत्र के युग्म संयोग में मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन प्रातः 9:32 पर मकर संक्रांति अर्की है। 14 जनवरी को प्रातः 9:32 से सूर्यास्त तक पुण्य काल रहेगा। इस वर्ष मकर संक्रांति 4 साल बाद विशेष रूप से पीले वस्त्र पहने, गदा हाथ में लिए और खीर का भक्षण करती हुई, बाल्यावस्था में प्रवेश कर रही है। जिसका वाहन बाघ रहेगा, यह संक्रांति पश्चिम दिशा में गमन कर रही है।
इस वर्ष मकर संक्रांति पर खास तरह के शुभ संयोग बन रहे हैं। शुभ संयोग होने से मकर संक्रांति पर दान, स्नान और जप करने का महत्व बढ़ जाता है। इस साल मकर संक्रांति पर पुष्य नक्षत्र रहेगा, इसकी शुरुआत 14 जनवरी को सुबह 10.27 से होगी और समाप्ति 15 जनवरी को सुबह 10.50 पर होगी। पुष्य नक्षत्र के अधिपति शनि देव हैं, वहीं मकर संक्रांति भी शनि देव को समर्पित है।
आइए जानते हैं मकर संक्रांति दिन किन चीजों का दान करना चाहिए।
काले तिल का दान: मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदी में स्नान करने के बाद गरीब और जरूरतमंद को काले तिल का दान करने से शनि दोष दूर होता है।
इस वर्ष मकर संक्रांति पुनर्वसु एवं पुष्य नक्षत्र विष्कुम्भ योग, वालव करण, मिथुन लग्न और कर्क राशि पर संक्रमण करेगी।
शतभिषा नक्षत्र पर मकर संक्रांति होने से राजाओं में सुख शांति होती है रस पदार्थ दूध एवं खेती की उपज अधिक होती है गेहूं चना आदि अनाजों को उत्पादन अधिक और शुभ होता है मांगलिक कार्यों में वृद्धि होती है सभी प्रकार के रोगों का नाश होता है जनता निर्भय होती है क्षत्रिय एवं व्यापारी वर्ग को सुखद एवं लाभकारी रहेगा। नक्षत्र संकेत दे रहे हैं कि अनाज के मूल्यों में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं रहेगा साथ ही साथ राजनीतिक हलचल बढ़ेगी।
इस बार मकर संक्रांति बाघ वाहन पर आई है और इसका उपवाहन अश्व है। यह संयोग ऋषि, मुनियों और तपस्वियों के लिए विशेष रूप से अच्छा रहेगा। बाघ वाहन का अर्थ है साहस, शक्ति और आत्मनिर्भरता का उदय, जबकि अश्व उपवाहन गति और ऊर्जा का प्रतीक है। यही वजह है कि संक्रांति शुभ संकेत लेकर आ रही है।
सूर्य भगवान छह महीने उत्तरायण और छह महीने दक्षिणायण होते है। उत्तरायण देवताओं का दिन होता है और राक्षसों की रात होती है। दक्षिणायण काल में देवताओं की रात्रि और राक्षसों का दिन होता है। दक्षिणायन में किसी भी तरह का शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। सूर्य जय उत्तरायण की स्थिति में आता है अर्थात मकर राशि में प्रवेश करता है, इसके बाद ही शुभ कार्य संपन्न करना चाहिए।
मंगलवार को मकर संक्रांति पड़ने से अनाजों के भाव में तेजी आती है तथा छल कपट की वृद्धि होती है शीत लहर का प्रकोप से जन धन की खेती होती है खंड वृष्टि भी संभावित होती है साथ ही साथ अन्न का उत्पादन भी अधिक होता है और जनता सुखी होती है।
बाघ वाहन होने से सूर्य की किरणें तेज होती हैं। तेज की वृद्धि होती है, यज्ञ, धर्म, धार्मिक उत्सव आदि अधिक होते हैं।
संक्रांति पर पुण्य काल के समय पवित्र नदियों में डुवकी लगाने की मान्यता है। इससे पुण्य फल की प्राप्ति होती है। 14 जनवरी को स्नान-दान करना, दान, जप, तुलादान, गौदान, स्वर्णदान, वृक्षारोपण करना शुभ होगा।

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