नर्मदापुरम। माता सावित्रीबाई फुले के जन्म जयंती स्थानीय नव अंकुर संस्था में सामाजिक एवं जनमानस ने श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनके जीवन पर प्रकाश डाला संयुक्त माली सैनी सामाजिक कल्याण समिति के अध्यक्ष अजय सैनी ने माता सावित्रीबाई फुले जयंती पर संबोधित करते हुए कहा माता न सिर्फ पहली महिला शिक्षिका थी। बल्कि महान समाज सेविका और नारी मुक्ति आंदोलन की प्रणेता भी थीं। उनका पूरा जीवन समाज के वंचित तबके खासकर महिलाओं और दलितों के अधिकारों के लिए संघर्ष में बीता। उनका नाम आते ही सबसे पहले शिक्षा और समाज सुधार के क्षेत्र में उनका योगदान हमारे सामने आता है। वे हमेशा महिलाओं और वंचितों की शिक्षा के लिए जोरदार तरीके से आवाज उठाती रहीं। संयुक्त माली सैनी समाज के सचिव बृजमोहन सैनी ने कहा कि वे अपने समय से बहुत आगे थीं और उन गलत प्रथाओं के विरोध में हमेशा मुखर रहीं। फुले एक महान समाज सुधारक दार्शनिक कवयित्री और शिक्षाविद् भी थीं। उनके पति महात्मा ज्योतिराव फुले भी एक प्रसिद्ध चिंतक और लेखक थे। इसी क्रम सतीश बिल्लौरे ने कहा कि फुले का विचार और प्रयास सदैव शिक्षा से समाज के सशक्तिकरण पर गहरा विश्वास था। जब महाराष्ट्र में अकाल पड़ा तो सावित्रीबाई और महात्मा फुले का सामाजिक न्याय का ऐसा उदाहरण विरले ही देखने को मिलता है। जब वहां प्लेग का भय व्याप्त था तो उन्होंने खुद को लोगों की सेवा में झोंक दिया। इस दौरान वे खुद इस बीमारी की चपेट में आ गईं। अंकित सैनी ने संबोधित करते हुए कहा कि उनका मानवता को समर्पित उनका जीवन आज भी हम सभी को प्रेरित कर रहा है। इस आयोजन में दीपक सैनी राजू मालवीय अनिल सैनी कृष्ण गुप्ता अबीर शुभम शर्मा शिवम सैनी गणेश अर्जुन मेहरा राजू सैनी।सामाजिक व्यक्ति के साथ.साथ शहर के गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित हुए।







