उमर अब्दुल्ला की पार्टी में बगावत? मंत्रिमंडल विस्तार से दर्जनों विधायक नाराज, गुप्त बैठक की

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श्रीनगर, (आरएनएस)। जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस में अंदरूनी असंतोष उभरकर सामने आया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व को लेकर पार्टी के विधायकों के बीच नाराजगी बढ़ती जा रही है। खबरों के मुताबिक, पार्टी के करीब दो दर्जन विधायक मुख्यमंत्री के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। हाल ही में 21 नाराज विधायकों ने पूर्व मंत्री एवं विधायक कैसर जमशेद लोन के आवास पर बैठक कर मंत्रिमंडल में व्यापक फेरबदल की मांग उठाई। बैठक में विधायकों ने निर्णय लिया कि वे नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला से मुलाकात कर अपनी नाराजगी और मांगों से अवगत कराएंगे। इसके लिए विधायक नजीर अहमद गुरेजी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है। यह समिति जल्द ही फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मिलकर प्रस्ताव सौंपेगी। नाराज विधायकों की प्रमुख मांगों में मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को पद से हटाना और मंत्रिमंडल में व्यापक फेरबदल करना शामिल है। विधायकों ने मंत्रियों के बीच विभागों की जिम्मेदारियों का नए सिरे से बंटवारा करने की भी मांग की है। इसके अलावा उनका कहना है कि जिन मंत्रियों को पद संभाले दो वर्ष हो चुके हैं, उन्हें मंत्रिमंडल से हटाकर नए चेहरों को मौका दिया जाना चाहिए।
\ कुछ विधायकों ने नए मंत्रियों को लेकर भी आपत्ति जताई है।
दरअसल, इस असंतोष की शुरुआत 27 अक्टूबर को हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद हुई। इस विस्तार में कई वरिष्ठ विधायकों को मंत्री पद नहीं मिल पाया, जबकि उन्हें इस पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा था। इनमें नजीर अहमद गुरेजी, अब्दुल मजीद लर्मी और मुबारक गुल जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं। मंत्री पद से वंचित रहने के बाद नजीर अहमद गुरेजी और अब्दुल मजीद लर्मी ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए पार्टी नेतृत्व की आलोचना भी की थी।
नाराज विधायकों का आरोप है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और वरिष्ठता को नजरअंदाज करते हुए अपने करीबी नेताओं को मंत्रिमंडल में प्राथमिकता दी है। उनका मानना है कि मंत्रियों का चयन वरिष्ठता, योग्यता और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पार्टी के भीतर उठे इन मतभेदों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब सभी की नजरें फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ प्रस्तावित बैठक तथा नाराज विधायकों की मांगों पर पार्टी नेतृत्व के रुख पर टिकी हैं।

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