चुनाव आयोग ने मतदाता सूचियों की पवित्रता नष्ट कर दी: पवन खेड़ा

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नई दिल्ली, (आरएनएस)। भारत निर्वाचन आयोग की ओर से 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फोटोयुक्त मतदाता सूचियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की घोषणा के एक दिन बाद कांग्रेस ने शुक्रवार को आयोग पर निशाना साधा। पार्टी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूचियों की विश्वसनीयता और उनकी पवित्रता को नुकसान पहुंचाया है। कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी से सवाल किया कि वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग पर विचार करने के बजाय उनका बचाव क्यों कर रही है। ‘मतदाता सूची में गड़बड़ी’ और ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर विपक्षी गठबंधन की ओर से किए जा रहे प्रदर्शनों में सक्रिय कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग कर रही है। पार्टी कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद पवन खेड़ा ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाया और कहा कि इनसे जुड़े आरोपों के निशान आसानी से नहीं मिटेंगे। खेड़ा ने कहा, ये दाग बहुत गहरे हैं। इन्हें इतनी आसानी से मिटाया नहीं जा सकेगा। ये खून के दाग हैं। भले ही समय के साथ ये दाग मिट जाएं, लेकिन लोगों के मन में इनकी याद बनी रहेगी। लोग यह नहीं भूल सकते कि यहां खून के दाग हैं।
मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान विभिन्न राज्यों में बूथ स्तरीय अधिकारियों की मौतों का उल्लेख करते हुए खेड़ा ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान कई अधिकारियों की मौत हुई और कुछ ने आत्महत्या भी की। उनके अनुसार, पिछले एक साल में देश की लोकतांत्रिक और चुनावी प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा है।
खेड़ा ने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को जिस तरह प्रभावित किया गया है, उससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि पहले मतदाता सूचियों की एक अलग विश्वसनीयता हुआ करती थी, लेकिन अब उस पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कहा कि अब मुद्दा केवल किसी एक पदाधिकारी का नहीं, बल्कि सत्ता परिवर्तन का है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, जिसमें उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर सत्ता परिवर्तन की कोशिश करने का आरोप लगाया था, खेड़ा ने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य चुनाव के माध्यम से सरकार बदलना होता है। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष सडक़ों पर उतरकर आंदोलन करता है, तो सत्ता परिवर्तन की मांग लोकतांत्रिक राजनीति का हिस्सा होती है।
सरकार बदलने संबंधी कार्यकर्ता प्रशांत भूषण के बयान पर पूछे गए सवाल के जवाब में खेड़ा ने कहा कि जब प्रशांत भूषण ने सत्ता परिवर्तन की बात कही, तो उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा, जबकि वर्ष 2013 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के खिलाफ ऐसी मांग किए जाने पर उन्हें अलग नजरिए से देखा जाता था।
अखिल भारतीय छात्र संघ की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा के बांग्लादेश संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस को प्रेरणा लेने के लिए किसी दूसरे देश की ओर देखने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने दावा किया कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कांग्रेस ने देश को अनेक महान नेता और नायक दिए हैं।
खेड़ा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी विरासत, इतिहास और प्रतीकों से प्रेरणा लेती है। उनके अनुसार, पार्टी को अपनी पहचान स्थापित करने के लिए किसी अन्य देश या संगठन के प्रतीकों का सहारा लेने की जरूरत नहीं है।
राष्ट्रीय राजधानी में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से निकाले जा रहे तिरंगा मार्च के संबंध में पूछे गए सवाल पर खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस हर उस संगठन के साथ है, जो शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करता है।
मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण, चुनाव आयोग की भूमिका और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। कांग्रेस ने जहां चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं, वहीं इन आरोपों और मांगों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच टकराव जारी है।

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