सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: चुनावी हलफनामे में झूठ पर अब जनता करेगी केस, क्या नेताओं की बढ़ेगी मुश्किलें?

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नई दिल्ली (ए.)। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने या जरूरी तथ्य छिपाने पर आम नागरिक भी उम्मीदवार के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में सीआरपीसी की धारा 195 की पाबंदी लागू नहीं होगी और शिकायत केवल चुनाव आयोग ही दर्ज करा सकता है, ऐसा जरूरी नहीं है। यह फैसला कर्नाटक के विधायक शैलेंद्र बेल्दाले के खिलाफ राजकुमार मदकी की शिकायत से जुड़े मामले में आया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने विधायक के खिलाफ रद्द की गई कार्यवाही बहाल नहीं की।सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने या अहम तथ्य छिपाने पर आम नागरिक भी उम्मीदवार के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि ऐसी शिकायतों के लिए चुनाव आयोग की मंजूरी की जरूरत नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी हलफनामे को लेकर क्या फैसला सुनाया?
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार, 16 अक्तूबर को कहा कि कोई भी नागरिक चुनाव लडऩे वाले उम्मीदवार के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकता है, अगर उसने नामांकन के साथ दाखिल हलफनामे में गलत जानकारी दी हो या जरूरी तथ्यों को छिपाया हो। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में शिकायत दर्ज कराने के लिए भारतीय नागरिकों को केवल चुनाव आयोग पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। यह मामला जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 125ए से जुड़ा है। यह प्रावधान चुनाव लडऩे वाले उम्मीदवारों की ओर से गलत जानकारी देने, जरूरी तथ्यों को छिपाने या अनिवार्य जानकारी का खुलासा नहीं करने पर दंड का प्रावधान करता है।
चुनाव आयोग की अनुमति जरूरी है या नहीं?
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125ए के तहत निजी नागरिक की ओर से दायर शिकायत पर दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 195 की पाबंदी लागू नहीं होगी।सीआरपीसी की धारा 195 कुछ खास अपराधों में अदालत को सीधे संज्ञान लेने से रोकती है, जब तक अधिकृत सरकारी अधिकारी या संबंधित अदालत लिखित शिकायत न करे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 125ए के तहत चुनावी हलफनामे से जुड़े मामले में निजी शिकायत को इस पाबंदी से गुजरना जरूरी नहीं है।अदालत ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति किसी निर्वाचित उम्मीदवार को परेशान करने के लिए झूठी या बेबुनियाद शिकायत करता है, तो सक्षम मजिस्ट्रेट मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के अनुसार उचित आदेश दे सकते हैं।
यह मामला किस उम्मीदवार और किस आरोप से जुड़ा था?
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राजकुमार मदकी की अपील पर आया। उन्होंने कर्नाटक के बीदर विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित विधायक शैलेंद्र बेल्दाले के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। मदकी का आरोप था कि बेल्दाले ने 2023 के विधानसभा चुनाव में नामांकन के साथ दाखिल हलफनामे में अपने आवासीय पते के बारे में गलत जानकारी दी थी।
मदकी ने बंगलूरू के अतिरिक्त मुख्य महानगर दंडाधिकारी के समक्ष सीआरपीसी की धारा 200 के तहत निजी आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि विधायक का कृत्य जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125ए के तहत दंडनीय है।

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